अपने दुःख से कम और दूसरों के सुख से ज्यादा दुःखी है आदमी
मैहर वाली शारदा माता धाम से एक अनमोल चिंतन ….. रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम से
(मैहर) जो लोग दूसरे के उत्कर्ष को देखकर जलते हैं फिर उन्हें जलाने के लिए किसी अग्नि की भी आवश्यकता नहीं होती। सच मानिये आज आदमी अपने दुःख से कम दुःखी और दूसरों के सुख से ज्यादा दुःखी है। शास्त्रों में इसे ही मत्सर भाव कहा गया है।
रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम कहती है कि दूसरों को देखकर जीना, स्वयं को दुखाकर जीने जैसा है। किसी की खुशी को देखकर जलना उस मशाल की तरह जलना है, जिसे दूसरों को खाक करने से पहले स्वयं को राख करना पड़ता है। आपके पास जो है निसंदेह वह पर्याप्त है। जो प्राप्त है उसके लिए परमात्मा को धन्यवाद दो एवं जो नहीं मिला उसके लिए किसी को दोष देने की बजाय अपनी योग्यता को बढ़ाकर निरंतर पुरुषार्थ में जुट जाओ,जीवन स्वतः सुखमय बन जायेगा।
हमारे पास जितना है उससे संतोष नहीं , जो नहीं है उसका चिन्तन करके जीव दुःखी होता है…!
✍️ RPKP INDIA NEWS मैहर से रवींद्र सिंह (मंजू सर) की कलम से
