संस्कृति, सभ्यता, इतिहास को सहेजकर रखना महत्वपूर्ण

कुशल शासक प्रशासक थे पंडित गोविंद पंत खैर – सांसद डॉक्टर लता वानखेड़े

(सागर) संस्कृति, सभ्यता ,इतिहास को सहेजकर रखना महत्वपूण, कुशल शासक प्रशासक थे पंडित गोविंद पंत खैर। उक्त विचार सांसद डॉक्टर लता वानखेड़े ने जिला पुरातत्व पर्यटन एवं संस्कृति परिषद जिला सागर द्वारा विश्व धरोहर सप्ताह के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए।

इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री रूपेश उपाध्याय, डिप्टी कलेक्टर श्री नवीन ठाकुर, श्री शिवाकांत बाजपेइर्, सुश्री खुशबू पटेल, श्री मुकेश पटेल, श्री जलज जैन सहित अन्य जन प्रतिनिधि अधिकारी मौजूद थे
सांसद डॉ लता वानखेड़े ने कहा कि संस्कृति, सभ्यता, पुरातत्व इतिहास को सहेज कर रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि जब कोई चीज सही चीज जाती है तब उसका सही महत्व समझ में आता है और महत्व समझ में आ जाए तब उसका मतलब समझ में आता है उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति को कभी भूलना नहीं चाहिए क्योंकि संस्कृति समाज ही हमें आगे बढ़ने का मौका देती है।

सांसद डॉक्टर वानखेड़े ने कहा कि मैं आज अभीभूत हूं कि जिला प्रशासन ने यह पहल की और मुझे  आमंत्रित किया इसके लिए मैं उनको धन्यवाद ज्ञापित करती हूं। उन्होंने कहा कि सागर के अनेक व्यक्तियों को आज भी नहीं मालूम कि सागर की स्थापना किसने की। इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित होते रहेंगे तो पूरा इतिहास मालूम होता रहेगा। उन्होंने कहा कि गोविंद पंत खैर कुशल शासक प्रशासक थे और उन्होंने सागर की स्थापना की। 20 दिसंबर को पंडित गोविंद पंत खैर की पुण्यतिथि है पुण्यतिथि पर भी सागर में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

मराठा कालीन बुंदेलखण्ड सागर के सन्दर्भ में गोविन्द पंत खेर बुंदेला पर केंद्रित संगोष्ठी में श्री गोविन्द पंत खेर बुदेला का सागर नगर के विकास में राजनैतिक योगदान पर डॉ. बी. के. श्रीवास्तव, प्रोफ़ेसर, आधुनिक इतिहास, डॉ हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर ने विस्तार से जानकारी दी। इसी प्रकार श्री गोविन्द पंत खेर बुदेला का सागर को नगरीय एवं प्रशासनिक इकाई के रूप में विकसित करने में योगदान पर डॉ. अनिरुद्ध सूबेदार, असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, गुरुग्राम विश्वविद्यालय हरियाणा ने अपना व्याख्यान दिया। जबकि श्री गोविन्द पंत खेर बुदेला का सागर के विकास में आर्थिक एवं सांस्कृतिक योगदान  पर डॉ. रजनीश जैन, इतिहासकार ने कहा कि सागर के आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए विकास में में पंडित गोविंद पंत खैर का सबसे बड़ा योगदान है उन्होंने ही सागर शहर की स्थापना में प्रशासनिक इकाई के रूप में गठन किया और यहां की अर्थव्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर के अन्य राज्यों से जोड़ा। यहां समृद्ध मराठी संस्कृति की स्थापना की जिसका फायदा अन्य सभी समुदायों को भी मिला। कार्यक्रम में सागर के पुरातत्व, पर्यटन एवं साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ नागेश दुबे, डॉक्टर बीके श्रीवास्तव, डॉ मोहनलाल, डॉ अनिरुद्ध सूबेदार, डॉक्टर शिवाकांत वाजपेइर्, डॉक्टर रजनीश जैन, डॉक्टर अहमद कादरी, श्री सुखदेव तिवारी, श्री चतुर्भुज सिंह राजपूत, श्री गोविंद सवैया, डॉक्टर शरद सिंह, डॉक्टर पंकज तिवारी, डॉ बलवंत सिंह भदोरिया, डॉक्टर आकाश मालवीय, डॉक्टर नीलिमा पिंपलापुरे, डॉक्टर अनिरुद्ध पिंपलापुरे का सम्मान किया गया।

अपर कलेक्टर श्री रुपेश उपाध्याय ने बताया कि यह कार्यक्रम जिला पुरातत्व पर्यटन एवं संस्कृति परिषद जिला सागर, रंग के साथी ग्रुप सागर इंटेक्स सागर चैप्टर विरासत मध्य प्रदेश न्यास, सत्यम कला एवं संस्कृति संग्रहालय सागर के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर अरविंद जैन ने किया।

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