बरही के शव गृह की भयावह हकीकत: चार महीने से बिना बिजली पड़ा रहा फ्रीजर, शव खराब होने की नौबत आई तो खुली सिस्टम की पोल
(बरही) कटनी जिला अंतर्गत बरही नगर के मंडी परिसर के पीछे करोड़ों की सरकारी व्यवस्थाओं के बीच बना नवीन शव गृह आज प्रशासनिक लापरवाही का ऐसा प्रतीक बन गया है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। जिस शव गृह का उद्देश्य मृतकों के शवों को सुरक्षित रखना है, वहीं चार महीने से बिजली कनेक्शन नहीं होने के कारण फ्रीजर केवल शोपीस बनकर रह गया। इस भयावह सच्चाई का खुलासा तब हुआ, जब एक सड़क हादसे में मृत युवक का शव पूरी रात फ्रीजर में रखा रहने के बावजूद सुरक्षित नहीं रह सका।
1 जुलाई की देर शाम पिपरिया कला के समीप हुए हाइड्रा हादसे में कछड़ारी-बगैहा निवासी हरकेश यादव की मौत हो गई थी। पुलिस ने पंचनामा और अन्य वैधानिक कार्रवाई पूरी करने के बाद रात लगभग 10 बजे परिजनों, ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में शव को शव गृह के फ्रीजर में रखवा दिया। उस समय पूरे क्षेत्र की बिजली गुल थी। सभी को विश्वास था कि बिजली आते ही फ्रीजर स्वतः चालू हो जाएगा और शव सुरक्षित रहेगा। लेकिन अगले दिन सुबह जो दृश्य सामने आया, उसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। आरोप है कि पूरी रात फ्रीजर चालू ही नहीं हुआ, क्योंकि शव गृह में स्थायी बिजली कनेक्शन ही नहीं था। परिणामस्वरूप शव खराब होने लगा और परिजनों के सामने अपने प्रियजन का शव ऐसी स्थिति में देखकर दुःख कई गुना बढ़ गया।

स्थिति यहीं तक सीमित नहीं रही। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब परिजनों और मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने शव को फ्रीजर से निकालकर शव वाहन में रखा, तब हाथ धोने के लिए पानी तक उपलब्ध नहीं था। शव गृह परिसर में न नल चला, न पानी मिला। मजबूरी में लोगों को बाहर सड़क पर बारिश से गड्ढों में भरे गंदे पानी से अपने हाथ धोने पड़े। एक आधुनिक शव गृह में यह दृश्य न केवल शर्मनाक था, बल्कि सरकारी दावों की वास्तविकता भी उजागर कर गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नवीन शव गृह बनने के बाद केवल लगभग दस दिनों तक समीप स्थित मंडी परिसर से अस्थायी बिजली लाइन जोड़कर फ्रीजर चलाया गया था। उसके बाद वह व्यवस्था समाप्त कर दी गई और आज तक स्थायी बिजली कनेक्शन नहीं जोड़ा गया। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि सरकारी संसाधनों की घोर उपेक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि चार महीने तक किसी जिम्मेदार अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग या स्थानीय प्रशासन ने यह जानने की भी कोशिश नहीं की कि शव गृह का फ्रीजर वास्तव में चालू है या नहीं। यानी जिस व्यवस्था पर मृतकों के सम्मान और परिजनों की संवेदनाएं निर्भर थीं, उसकी किसी ने सुध तक नहीं ली।
संयोग से जिस गांव के मृतक थे, उसी गांव का एक युवक परिजनों के साथ सुबह लगभग 10 बजे शव लेने पहुंचा। वहां की बदहाल स्थिति देखकर उसने अपने मोबाइल से वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। देखते ही देखते वीडियो वायरल हो गया और वर्षों से छिपी व्यवस्था की पोल पूरे क्षेत्र के सामने खुल गई। लोगों का कहना है कि यदि यह वीडियो सामने नहीं आता, तो शायद यह गंभीर लापरवाही आगे भी छिपी रहती।
अब क्षेत्र में लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि शव गृह जैसी अत्यंत संवेदनशील जगह पर बिजली, पानी, फ्रीजर और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध न होना प्रशासनिक उदासीनता की पराकाष्ठा है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि करोड़ों रुपये की योजनाओं और विकास के दावों के बीच आखिर एक शव गृह जैसी आवश्यक व्यवस्था क्यों उपेक्षा का शिकार रही?
अब जनता जवाब मांग रही है चार महीने तक बिजली कनेक्शन क्यों नहीं कराया गया? फ्रीजर की नियमित जांच किसकी जिम्मेदारी थी? शव गृह में पानी जैसी बुनियादी सुविधा क्यों नहीं थी? क्या इस गंभीर लापरवाही के लिए किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी? या फिर हर बार की तरह जांच और आश्वासन देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा शव गृह में तत्काल स्थायी बिजली कनेक्शन, जनरेटर या अन्य बैकअप व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, हाथ धोने की सुविधा और सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि मृतकों के सम्मान और उनके परिजनों की संवेदनाओं से जुड़ी ऐसी लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।
✍️ नीरज तिवारी
RPKP INDIA NEWS
बरही
