मैहर वाली शारदा माता धाम से एक अनमोल चिंतन ….. रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम से

(मैहर) कमरा कितना भी साफ हो “धूल” तो हो ही जाती है, इंसान कितना भी अच्छा हो “भूल” तो हो ही जाती है।

“मैं अपनी ‘ज़िंदगी’ में हर किसी को ‘अहमियत’ देता हूँ… क्योंकि जो ‘अच्छे’ होंगे वो ‘साथ’ देंगे… और जो ‘बुरे’ होंगे वो ‘सबक’ देंगे…!! जिंदगी जीने के लिए सबक और साथ दोनों जरुरी होता है।

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