म.प्र. जन अभियान परिषद विजयराघवगढ़ ने मनाई आदि गुरु शंकराचार्य जयंती
(विजयराघवगढ़) विकासखंड विजयराघवगढ़ में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा आदि गुरु शंकराचार्य जी की जयंती एकात्म पर्व के रूप में हर्षोल्लास से मनाई गई। जनपद पंचायत विजयराघवगढ़ के सभागार में आयोजित इस अवसर पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य शंकराचार्य जी की पूजा-अर्चना व माल्यार्पण से हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में गरुड़ध्वज आश्रम से विमलेंद्र प्यासी एवं प्राचार्य अनिल मिश्रा उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया।

कार्यक्रम के दौरान विकासखंड समन्वयक श्रीमती आरती गुप्ता ने जन अभियान परिषद की योजनाओं व सतत विकास की अवधारणा पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता ने अपने वक्तव्य की शुरुआत शंकराचार्य जी के प्रसिद्ध वाक्य “जहां हरि है, वहां मैं नहीं और जहां मैं हूं, वहां हरि नहीं” से करते हुए कहा कि उनका जीवन दर्शन एकात्म मानववाद से परिपूर्ण था। वे वेदांत और उपनिषदों का गहन अध्ययन कर मात्र 23 वर्ष की आयु में धर्म और ज्ञान की गहराइयों तक पहुँच चुके थे।

उन्होंने बताया कि आदि गुरु शंकराचार्य ने देश के चारों कोनों में मठों की स्थापना कर सनातन धर्म को एक नई दिशा दी और आक्रांताओं द्वारा फैलाए जा रहे भ्रमों का खंडन कर सर्वं खल्विदं ब्रह्म की भावना को स्थापित किया।
उन्होंने कहा कि आज समाज को शासन पर आश्रित न होकर आत्मनिर्भर बनना चाहिए और आदर्श ग्राम की कल्पना को साकार करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन परामर्शदाता राकेश गर्ग एवं आभार प्रदर्शन अवधेश शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में नवांकुर संस्थान के सदस्य
तुलसीदास तिवारी, देवनारायण शर्मा, विष्णुकांत तिवारी , सरला कोरी, परामर्शदाता फग्गूलाल यादव, पंकज पटेल, प्रीति बडगैया, अर्चना गौतम एवं समिति सदस्य सामुदायिक नेतृत्व क्षमता एवं सतत विकास के आयाम पाठ्यक्रम अंतर्गत एमएसडब्ल्यू / बीएसडबलू छात्र- छात्रों की उपस्थिति रही
✍️ संतोष प्रसाद तिवारी
RPKP INDIA NEWS
कैमोर
