आईटी एक्ट 2000 में संशोधन: पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर संकट के बादल, निगरानी का बढ़ता साया चिंताजनक
(कटनी) जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया, मध्य प्रदेश इकाई, केंद्र सरकार द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) संशोधन नियम, 2025 के माध्यम से आईटी एक्ट 2000 में किए गए संशोधन पर गहन चिंता व्यक्त करती है। यह संशोधन, जो 1 नवंबर 2025 से प्रभावी होगा, इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गैरकानूनी, भ्रामक या देश की अखंडता को प्रभावित करने वाले कंटेंट को 36 घंटे के भीतर हटाने का आदेश देता है, निश्चित रूप से देश की सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था की रक्षा का दावा करता है। लेकिन हम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि यह कदम पत्रकारिता की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 19) पर गंभीर खतरा पैदा करता है।
सरकार का दावा है कि “यह नियम फ्री स्पीच पर नहीं, अवैधता पर प्रहार है।” हम इसकी सराहना करते हैं कि संशोधन में केवल सक्षम न्यायालय या वरिष्ठ अधिकारियों (संयुक्त सचिव/डायरेक्टर/DIG स्तर) की लिखित सूचना को वैध माना गया है और हर आदेश की मासिक समीक्षा सचिव स्तर पर होगी, जो दुरुपयोग रोकने का प्रयास है। लेकिन व्यावहारिक रूप से, यह अस्पष्ट परिभाषाओं (“गैरकानूनी” या “भ्रामक” कंटेंट) के कारण पत्रकारों, ब्लॉगर्स और स्वतंत्र मीडिया को निशाना बनाने का हथियार बन सकता है। डिजिटल एक्सपर्ट्स की चिंता सही है—यह ऑनलाइन स्वतंत्र अभिव्यक्ति को सीमित कर निगरानी को बढ़ावा देगा, जिससे ‘डिजिटल इंडिया’ का सपना अधूरा रह जाएगा।
मध्य प्रदेश जैसे राज्य में, जहां पत्रकारिता ग्रामीण मुद्दों, भ्रष्टाचार उजागर करने और सामाजिक न्याय की आवाज बनने का माध्यम रही है, यह संशोधन स्थानीय पत्रकारों को और असुरक्षित बना देगा। हाल के वर्षों में मध्य प्रदेश में पत्रकारों पर हमले, धमकियां और सेंसरशिप के मामले बढ़े हैं—यह संशोधन इन्हें वैध ठहराने का खतरा है। हम याद दिलाते हैं कि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने बार-बार पत्रकारिता की स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी है, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स रैंकिंग (2025 में 150वां) पहले से ही चिंताजनक है।
जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया, मध्य प्रदेश इकाई की मांगें
संशोधन पर पुनर्विचार: तत्काल प्रभाव से इसे स्थगित कर व्यापक परामर्श (पत्रकार संगठनों, सिविल सोसाइटी और विशेषज्ञों के साथ) करें।
सुरक्षा उपाय: पत्रकारों के लिए विशेष सुरक्षा प्रावधान जोड़ें, जिसमें कंटेंट हटाने के आदेशों पर स्वतंत्र अपील तंत्र शामिल हो।
पारदर्शिता: “गैरकानूनी कंटेंट” की स्पष्ट परिभाषा और वार्षिक रिपोर्टिंग अनिवार्य करें।
मध्य प्रदेश स्तर पर कार्रवाई: राज्य सरकार से अपील है कि स्थानीय पत्रकारों को संरक्षण प्रदान करे और इस मुद्दे पर विधानसभा चर्चा हो।
हम पत्रकार बंधुओं से आह्वान करते हैं कि इस मुद्दे पर एकजुट रहें और अपनी कलम की ताकत से लोकतंत्र की रक्षा करें। जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया, मध्य प्रदेश इकाई, सभी हितधारकों से अपील करती है कि इस संशोधन को अभिव्यक्ति की आजादी के अनुकूल बनाया जाए, ताकि ‘डिजिटल इंडिया’ में स्वतंत्रता बनी रहे और निगरानी का बोलबाला न हो।
जय हिंद! जय पत्रकारिता!
हरिशंकर पाराशर
संयोजक
जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया, मध्य प्रदेश इकाई
