“सकारात्मक दृष्टिकोण” समाधान की पहली सीढ़ी है … पं. सुरेन्द्र दुबे
(विजयराघवगढ़) सकारात्मकता अद्भुत चमत्कार करती है। सकारात्मकता हमारे भीतर व्याधियां नहीं उत्पन्न होने देती। हमें मानसिक विकार नहीं घेरेते। हम इसके सान्निध्य में प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। हमारे दृष्टिकोण की सकारात्मकता हमें प्रभावी बनाती है। इससे हमारे कार्य सरल होने लगते हैं ,जिसके कारण हम जीवन के नये आयाम स्थापित करने में सक्षम हो पाते हैं।
सकारात्मकता का मिठास हमें आनंदित कर देती है। यह आनंद ही हमें जीवन के वास्तविक अर्थ से परिचित कराता है, जिससे हम अपने अस्तित्व का कारण जान पाते हैं, उसका हेतु समझने लगते हैं। जब हम जीवन का हेतु समझ जाते हैं तो मोक्ष के मार्ग पर होते हुए, सफलता की ओर अग्रसर होते हैं। जीवन का हेतु सृष्टि के मंगल में निहित है। जब हमारे कार्य सृष्टि मंगल की ओर उन्मुख होतें हैं तो हम जीवन का यर्थाथ का अनुभव करने लगते हैं। सकारात्मकता के प्रवाह से ही लोकमंगल की सरिता बहती है।
‘सकारात्मक दृष्टिकोण’ समाधान की पहली सीढ़ी है, क्योंकि ‘सफलता’ का यह मूल मंत्र है कि चाहे जितनी विकट स्थिति हो अपना ‘धैर्य’ नहीं खोना चाहिए, अपने ‘उत्साह’ को बनाए रखना और सकारात्मकता के साथ पूरे ‘आत्म-विश्वास’ से आगे बढ़ना चाहिए।

