व्यक्ति के व्यक्तित्व को आकार देने में मनोवृत्ति की होती है महत्वपूर्ण भूमिका: पं सुरेन्द्र दुबे
(विजयराघवगढ़) व्यक्ति के व्यक्तित्व को आकार देने में मनोवृत्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मनोवृति जन्मजात न होकर समय के साथ विकसित होती है। इसका विकास व्यक्ति के परिवेश से होता है। इस परिवेश में शिक्षा, संस्कृति और संगति जैसे पहलुओं का समावेश होता है।
मनोवृत का प्रभाव व्यक्ति के आचार, विचार एवं व्यवहार में स्पष्ट दिखाई देता है।अच्छी मनोवृत्ति वाले व्यक्ति सकारात्मक सोच रखते हैं और दूसरों की सहायता एवं सुख की वृद्धि में सहायक बनते हैं।वहीं नकारात्मक मनोवृत्ति वाले लोग दूसरों को परेशान करने में ही आनन्द खोजते हैं।
यह उचित ही कहा गया है कि जैसा हम सोचते हैं वैसी ही हमारी प्रकृति और मनोवृत्ति हो जाती है। किसी भी व्यक्ति से कुछ देर बात करने से यह ज्ञात हो जाता है कि वह किस मनोवृत्ति का व्यक्ति है। व्यक्ति के आचार-विचार में उसकी मनोवृत्ति में झलकने लगती है।मनोवृत्ति ही प्रतिधारण या व्यक्तित्व का निर्माण करती है।
यदि हमारे व्यक्तित्व में कुछ “खास” होगा तो समय या मेरा स्वभाव हमारा “मूल्य” स्वयं बता देगा,इसलिए अपनी अच्छाईयों को “सिद्ध” करने का प्रयत्न करने की आवश्यकता नहीं होती है। “उचित समय” पर यह अवश्य “प्रकट” हो जाता है।
पं सुरेन्द्र दुबे
पत्रकार, विजयराघवगढ़

