अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस पर प्रशासन अकादमी में राष्ट्रीय संगोष्ठी, आनंदोत्सव विजेताओं को किया सम्मानित
आनंद भीतर से उपजता है, धन से नहीं: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
भोपाल | RPKP India News मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सच्चा आनंद भौतिक साधनों से नहीं, बल्कि मन की संतुष्टि और मानवीय भावों की तृप्ति से प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य अक्सर सुख-सुविधाओं और विलासिता में ही खुशी ढूंढता है, जबकि वास्तविक आनंद हमारे अंतर्मन में छिपा होता है। मुख्यमंत्री अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस के अवसर पर भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित “आनंद के आयाम” राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल भाव यह है कि हम दूसरों के सुख में भी अपना आनंद खोजें। उन्होंने बताया कि जीवन में सुख और दुख के बीच का अंतर समझना ही आनंद के वास्तविक आयामों को समझने की कुंजी है। उन्होंने सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना भारतीय जीवन शैली की आधारशिला है, जहां परिवार और समाज के साथ मिलकर जीने में ही वास्तविक खुशी निहित है।
आनंदोत्सव के विजेताओं को किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में 14 से 28 जनवरी तक आयोजित आनंदोत्सव के विजेताओं को नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी दोनों विधाओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को क्रमशः 25 हजार, 15 हजार और 10 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।
भारतीय संस्कृति में आनंद का विशेष महत्व
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने संतुलित जीवन का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यशोदा और नंद बाबा ने भी श्रीकृष्ण के पालन-पोषण में ही आनंद का अनुभव किया, जो इस बात का उदाहरण है कि सच्चा सुख दूसरों के जीवन में खुशियां लाने से मिलता है।
उन्होंने सिंहस्थ जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि साधु-संत कठिन तप और साधना के माध्यम से आनंद की अनुभूति प्राप्त करते हैं, जो हमें यह सिखाता है कि आत्मिक शांति ही स्थायी सुख का आधार है।
समाज में खुशहाली बढ़ाने की दिशा में प्रयास
कार्यक्रम में हरिद्वार से आए महर्षि मधुसूदन जी महाराज ने भी आनंद के दार्शनिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वेदांत में आनंद को ब्रह्म बताया गया है। वहीं आनंद विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि राज्य में ब्लॉक स्तर तक शासकीय सेवकों और विद्यार्थियों को आनंदित जीवन और सकारात्मक व्यवहार की दिशा में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय संगोष्ठी में दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के प्रतिनिधियों सहित कई विशेषज्ञों ने भाग लिया और आनंद, मानवीय मूल्यों तथा सामाजिक समरसता पर अपने विचार साझा किए।

