“विकास या विनाश? कटनी में ‘सीमेंट बनाम पानी’ की जंग तेज”
खनन और उद्योगों से सूख रहा भूजल, जहरीली हवा और बर्बाद होती खेती से भड़के ग्रामीण—नेताओं से दो टूक सवाल
(कटनी) जुकेही, मेहगांव, कैमोर क्षेत्र में खनन और सीमेंट उद्योगों के खिलाफ जनाक्रोश अब सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है। वर्षों से बढ़ते औद्योगिक दबाव के चलते ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र का भूजल तेजी से खत्म हो रहा है, हवा प्रदूषण से जहरीली बन चुकी है और खेती पूरी तरह बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर उनके जीवन और आजीविका से खिलवाड़ किया जा रहा है। लगातार हो रहे खनन और सीमेंट फैक्ट्रियों के विस्तार से न सिर्फ जलस्तर गिरा है, बल्कि पीने के पानी तक की किल्लत पैदा हो गई है।
गुस्साए ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि हर जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी से जवाब लिया जाएगा—“हमें सीमेंट चाहिए या पानी?”
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और कंपनियां उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही हैं। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।
