विश्व प्रेस दिवस: प्रेस की प्रयोजन शीलता

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विजयराघवगढ़। आज पत्रकारिता को लेकर बहुत से प्रश्न खड़े हो रहे हैं, कुछ प्रश्न विश्वसनीयता को लेकर भी है, कुछ प्रश्न दुरुपयोग को लेकर भी है। वास्तविक तस्वीर क्या है, वह किसी से भी छिपी नहीं है?

प्रायोजित खबरें, टेबिल न्यूज, क्रत्रिम रूप से पैदा किये गये भ्रम, जिससे सत्ता और शासन का उपयोग करना है। हर आदमी संदिग्ध दिखता है, पत्रकारिता की दुनिया में, आज हर खबर के पीछे कोई न कोई हिडन एजेंडा है। पता नहीं किस पर कौन सी खबर कहर ढा जाए, उससे अच्छे खासे सुखी जीने वाले का जीना हराम हो जाए।

सत्य मानव को बार बार जांचने परखने के बाद वैसा ही सामने आता है जैसा कि अस्तित्व में है, भ्रम में समस्याएं पैदा होती हैं, सत्य मानव को समाधान प्रस्तुत करता है, समाधान में मानव सुखी होता है, समस्याएं विपन्न बनाती हैं, समाधान समृद्धी लाता है।

आज पत्रकारिता प्रेस की आजादी खतरे में पड़ गई है, पत्रकारिता में भटकाव और समाज में मूल्य हीनता की बहुत चर्चा होती है। सत्य का आचरण क्या है….और पत्रकारिता का मिशन क्या है. किसी से भी छिपा नहीं है।

मनु नहीं मनु पुत्र हैं जो सामने,
जिनके जीभ में भी वक्त की धार होती है।
स्वप्न होते नहीं केवल विचारों के, स्वप्न के भी हांथ में तलवार होती है।

✍️ सुरेन्द्र दुबे, पत्रकार
       विजयराघवगढ़

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