आस्था के प्रतीक प्राचीन ‘रामसागर तालाब’ का पुनर्जन्म
युवाओं से लेकर बुजुर्गों, महिलाओं एवं दिव्यांगजनों तक सभी ने बढ़-चढ़कर किया श्रमदान
(जबलपुर) प्रदेश भर में चलाए जा रहे जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए 19 मार्च से संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत जनपद पंचायत सिहोरा के गोसलपुर में स्थित ऐतिहासिक रामसागर तालाब का कायाकल्प देखने को मिल रहा है। कई दशकों से उपेक्षा का शिकार रहा यह ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व का तालाब अब पुनः अपनी पहचान प्राप्त कर रहा है।
ग्रामीणों की आस्था से जुड़ा यह प्राचीन तालाब समय के साथ उपेक्षा का शिकार हो गया था। पूरे गांव की गंदगी, कचरा, नालियों का दूषित पानी तथा पूजन एवं हवन सामग्री लगातार तालाब में मिल रही थी, जिससे इसका पानी दूषित, जहरीला एवं सड़ चुका था। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि तालाब में वर्षों से जमा प्लास्टिक, गाद (कीचड़) और जलकुंभी को हटाना आसान नहीं था। पानी की दुर्गंध के बीच कार्य करना बेहद कठिन था, लेकिन सभी का हौसला मजबूत था। युवाओं से लेकर बुजुर्गों, महिलाओं एवं दिव्यांगजनों तक सभी ने बढ़-चढ़कर श्रमदान किया।
तालाब का पानी अब फिर से चमकने लगा
लगातार नौ सप्ताह तक चले अथक परिश्रम, जीवटता, जुनून और सामूहिक प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि जो तालाब कभी बदबू मार रहा था, वह आज साफ, सुंदर और स्वच्छ नजर आने लगा है। तालाब का पानी अब फिर से चमकने लगा है। जलीय जीव-जंतु एवं मछलियां स्वच्छंद रूप से विचरण करने लगी हैं। तालाब में उठती लहरें मनमोहक दिखाई दे रही हैं तथा जल की उपयोगिता भी बढ़ गई है। कई दशकों बाद लोग इसी तालाब में स्नान करते नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही ग्रामीणों एवं स्थानीय निवासियों के चेहरों पर आत्मसम्मान की चमक भी लौट आई है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण
सफाई अभियान के नौवें सप्ताह के अवसर पर पहुंचे मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक जी.डी. रायपुरिया ने कहा कि गोसलपुर ग्राम की यह सफलता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि समाज ठान ले तो वह अपनी तकदीर और तस्वीर स्वयं बदल सकता है। जन अभियान परिषद के मार्गदर्शन एवं ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की प्रेरणा से गोसलपुर गांव के श्रमवीरों ने न केवल अपने ऐतिहासिक तालाब को पुनर्जीवित किया है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत किया है। आज गोसलपुर ग्राम का यह प्राचीन एवं ऐतिहासिक रामसागर तालाब केवल एक जल निकाय नहीं, बल्कि ग्रामीणों की एकता, अटूट आस्था और सामूहिक श्रमदान का चमकता हुआ प्रतीक बन चुका है।
