ई-विकास पोर्टल से होगा उर्वरक वितरण, कलेक्टर ने की व्यवस्था की समीक्षा
किसान संगठनों, सहकारिता विभाग और उर्वरक विक्रेताओं के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक
(सतना) कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में ई-विकास पोर्टल के माध्यम से उर्वरक वितरण व्यवस्था के संबंध में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारी के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में किसानों को समय पर और पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराने तथा वितरण प्रक्रिया को सुचारु बनाने पर चर्चा की गई।
बैठक में अपर कलेक्टर विकास सिंह, उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास आशीष पाण्डेय, विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधि, सहकारिता विभाग, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, एमपी एग्रो, विपणन विभाग के अधिकारियों सहित उर्वरक के थोक एवं फुटकर विक्रेता उपस्थित रहे। बैठक के दौरान ई-विकास पोर्टल के माध्यम से उर्वरक वितरण की प्रक्रिया, उपलब्धता, भंडारण एवं किसानों को होने वाली संभावित समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया।
कलेक्टर ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और उर्वरक वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी एवं व्यवस्थित रहे। उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन को देखते हुए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा पोर्टल आधारित वितरण प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए, जिससे किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक प्राप्त हो सके। कलेक्टर ने कहा कि उर्वरक विक्रेता किसानों को अनुदानित उर्वरकों के साथ गैर-अनुदानित उर्वरकों को टैग नहीं करेंगे और ना ही लगौरा में किसी अन्य उर्वरक खरीदने के लिए बाध्य किया जायेगा। कलेक्टर ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री का कार्य जिले में तेजी से किया जा रहा है।
उन्होंने कृषक संगठन प्रतिनिधियों से कहा कि जिले केे किसानों को फार्मर रजिस्ट्री की आवश्यकता और महत्व को बताते हुए इस ओर उन्हें जागरूक करेे। किसान सभी खसरों की जानकारी और ओटीपी समय पर पटवारियों को उपलब्ध कराये। कलेक्टर ने कहा कि किसी दुकान में अनियमितता की स्थिति में फ्रीज करने की कार्यवाही के दौरान स्टाक को फ्रीज नहीं करते हुए अन्य दुकान में शिफ्ट कराये। उन्होंने बताया कि स्लाट बुकिंग की सुविधा अंतर जिला होने के फलस्वरूप अब मैहर और रीवा जिले के सरहद के कास्तकार दूसरे जिले की विक्रय केन्द्रों से भी खाद ले सकेंगे। कलेक्टर ने कहा कि उर्वरक वितरण में किसी भी प्रकार की समस्या आने पर किसान टोल फ्री नम्बर सीएम हेल्पलाइन अथवा कृषि तथा संबंधित अधिकारियों के मोबाइल नम्बर पर सम्पर्क कर सकते हैं।
उप संचालक कृषि आशीष पाण्डेय ने बताया कि वर्ष 2026-27 में अब तक सतना जिले में 31 हजार 367 मे. टन उर्वरकों का भण्डारण किया गया। जिसमें अब तक 9 हजार 270 मे. टन उर्वरक का वितरण किया गया है। जबकि 22 हजार 97 मे. टन खाद अभी भी मार्कफेड, एनपी एग्रो, समितियों एवं निजी दुकानों में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन में ई-विकास प्रणाली के माध्यम से खाद का वितरण किया जायेगा। डीएपी की खाद की आपूर्ति पूरी तरह से समितियों के माध्यम से होगी और एनपीके तथा अन्य फास्फेटिक उर्वरक पैक्स समितियों को पूर्ति करने के बाद कैस सेल में दिया जायेगा।
उप संचालक ने बताया कि अनुदानित उर्वरक के साथ गैर-अनुदानित उर्वरक टैग करने पर जिले में समिति सहित 8 निजी दुकानों के विक्रेताओं पर लाइसेंस निलंबन की कार्यवाही की गई है। कलेक्टर ने कहा कि उर्वरक की सुचारू वितरण और उपलब्धता की जानकारियों के आदान-प्रदान के लिए वितरण से संबंधित अधिकारियों का व्हाट्सअप ग्रुप तैयार करें और उप संचालक कृषि जिले में समितियों तथा निजी क्षेत्रों में उपलब्ध उर्वरक की जानकारी प्रतिदिन मीडिया और किसानों के प्रतिनिधियों के ग्रुप में पोस्ट करेंगे। किसान संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि स्लाट बुक करने के बाद खाद उठाने की समय-सीमा बढाकर एक सप्ताह की जानी चाहिए।
प्रतिनिधियों ने कहा कि तहसील और ब्लाक वार किसानों का आवश्यकता का आंकलन कर संबंधित वितरण केन्द्रों को खाद उपलब्ध कराई जाये। रामपुर बघेलान मंडी में खाद वितरण की व्यवस्था कराने की भी मांग की गई।
