भाजपा सरकार ने आदिवासियों की जमीन, जंगल और अधिकारों पर डाला डाका – जीतू पटवारी

कांग्रेस की सरकार बनते ही आदिवासी भूमि घोटालों की होगी निष्पक्ष जांच, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई और जमीन लौटाई जाएगी

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्रीजीतू पटवारी ने आज पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश में आदिवासी समाज के अधिकारों, उनकी जमीन, शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और सम्मान पर भाजपा सरकार द्वारा किए जा रहे लगातार हमलों को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने भारत की प्रथम महिला आदिवासी राष्ट्रपति के मध्यप्रदेश प्रवास का स्वागत करते हुए कहा कि महामहिम राष्ट्रपति जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी द्वारा आदिवासी समाज के लिए प्रयोग किए जाने वाले “वनवासी” शब्द पर आपत्ति दर्ज कर देश को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। कांग्रेस पार्टी और आदरणीय राहुल गांधी जी लगातार यह कहते रहे हैं कि आदिवासी केवल जंगलों में रहने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि वे इस देश के मूल निवासी हैं, जिनकी अपनी संस्कृति, पहचान, परंपरा और संवैधानिक अधिकार हैं।

श्री पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में लगभग 1 करोड़ 53 लाख आदिवासी निवास करते हैं, लेकिन भाजपा सरकार ने उनके जीवन, सम्मान और अधिकारों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। इसी संदर्भ में उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति को विस्तृत पत्र लिखकर आदिवासी समाज की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

श्री पटवारी ने आरोप लगाया कि कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि आदिवासी समाज की जमीन बिना सक्षम सरकारी अनुमति के गैर-आदिवासी नहीं खरीद सकते। इसके बावजूद विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्षों में प्रदेशभर में लगभग 1 लाख 26 हजार हेक्टेयर से अधिक आदिवासी भूमि का हस्तांतरण हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं, उनके संरक्षित उद्योगपतियों और प्रभावशाली लोगों ने सरकारी संरक्षण में आदिवासियों की जमीनें खरीदी हैं। कांग्रेस पार्टी स्पष्ट घोषणा करती है कि वर्ष 2028 में प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने पर ऐसे सभी भूमि सौदों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जहां भी अनियमितता, धोखाधड़ी या अवैध तरीके से भूमि हस्तांतरण पाया जाएगा, वहां दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी तथा आदिवासी समाज की जमीन उन्हें वापस दिलाई जाएगी।

श्री पटवारी ने कहा कि प्रदेश की लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर आदिवासी भूमि विभिन्न खनन परियोजनाओं और बड़ी कंपनियों को सौंप दी गई है। सोना, कोयला, मैंगनीज और अन्य खनिजों के दोहन के लिए आदिवासियों को उनकी पुश्तैनी जमीनों से बेदखल किया गया। सरकार ने जमीन के बदले जमीन देने के बजाय केवल आर्थिक मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली, जिसके कारण हजारों आदिवासी परिवार आज भूमिहीन होकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन के वास्तविक संरक्षक आदिवासी हैं, लेकिन भाजपा सरकार विकास के नाम पर जंगलों का विनाश कर रही है। पन्ना-छतरपुर-केन-बेतवा-सिंगरौली रेल परियोजना का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही और गलत योजना के कारण लगभग एक लाख पेड़ों की बलि दे दी गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा लागू किए गए वन अधिकार अधिनियम का मध्यप्रदेश में खुलेआम उल्लंघन हो रहा है और आदिवासियों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।

श्री पटवारी ने कहा कि आदिवासी समाज को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की योजनाओं में व्यापक भ्रष्टाचार व्याप्त है। आदिवासी छात्रों के लिए संचालित योजनाओं में भारी अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

उन्होंने मांग की कि आदिवासी समाज के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा से लेकर मेडिकल, इंजीनियरिंग और उच्च शिक्षा तक पूरी तरह निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित लगभग 1 लाख 53 हजार बैकलॉग पद वर्षों से खाली पड़े हैं। भाजपा सरकार जानबूझकर इन पदों को नहीं भर रही है, जिससे हजारों योग्य युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।

श्री पटवारी ने विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले वर्षों में प्रदेश से लगभग पौने दो लाख आदिवासी महिलाएं और युवतियां लापता हुई हैं या मानव तस्करी का शिकार बनी हैं। यह स्थिति अत्यंत भयावह और चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि एक ओर भाजपा सरकार “लाड़ली बहना” योजना का प्रचार करती है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी बहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े भी बताते हैं कि आदिवासियों पर अत्याचार के मामलों में मध्यप्रदेश देश में शीर्ष राज्यों में शामिल है।

श्री पटवारी ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का दायित्व सरकार से सवाल पूछना है, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जवाब देने के बजाय विपक्ष के नेताओं के लिए “नौसिखिया”, “दो कौड़ी का” और “पप्पू का चप्पू” जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अपने पद की गरिमा और संवैधानिक मर्यादाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि चप्पू की उपयोगिता बहुत अधिक होती है क्योंकि वही नाव को पार लगाता है, जबकि अहंकार और अभद्रता केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को डुबोने का काम करती है।

श्री पटवारी ने भाजपा सरकार पर प्रदेश में बड़े पैमाने पर तबादला उद्योग चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले जिस घोटाले को 200 करोड़ रुपये का माना जा रहा था, वह अब 500 करोड़ रुपये के कारोबार में बदल चुका है।

उन्होंने हाल ही में पटवारियों के बड़े पैमाने पर हुए तबादलों और 24 घंटे के भीतर उन्हें निरस्त किए जाने को इसका स्पष्ट प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रशासन नहीं, बल्कि तबादलों की मंडी चला रही है।

कांग्रेस का संकल्प
श्री पटवारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी आदिवासी समाज के जल, जंगल, जमीन, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा सरकार द्वारा किए गए हर अन्याय का हिसाब लिया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट घोषणा की कि कांग्रेस सरकार बनने पर आदिवासी भूमि सौदों, विस्थापन, वन अधिकारों के उल्लंघन, बैकलॉग भर्ती, महिलाओं की सुरक्षा और तबादला घोटालों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

“आदिवासियों की जमीन, जंगल और अधिकारों की रक्षा केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की लड़ाई है। कांग्रेस पार्टी इस लड़ाई को पूरी ताकत से लड़ती रहेगी।”

Share this:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह भी देखें