प्राकृतिक खेती से किसान होंगे आत्मनिर्भर, मिट्टी और मानव स्वास्थ्य दोनों होंगे सुरक्षित : सांसद डॉ. राजेश मिश्रा
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाने की दिशा में बढ़ रहा मध्यप्रदेश : विधायक रीती पाठक
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में प्राकृतिक खेती को एक नई दिशा मिली है। प्रधानमंत्री का लक्ष्य किसानों को रासायनिक खेती पर निर्भरता से मुक्त कर आत्मनिर्भर एवं टिकाऊ कृषि व्यवस्था की ओर अग्रसर करना है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हुई है तथा इसका प्रतिकूल प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। ऐसे में प्राकृतिक खेती केवल खेती की पद्धति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वस्थ भविष्य की आधारशिला है।
सांसद ने किसानों से आह्वान किया कि वे अपने खेत के कम से कम एक हिस्से में प्राकृतिक खेती की शुरुआत करें और उसके सकारात्मक परिणामों को स्वयं अनुभव करें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती खेती की लागत कम करने, उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने तथा पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम है।
विधायक रीती पाठक ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य सरकार किसानों को आधुनिक तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक और प्रकृति आधारित कृषि पद्धतियों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा कृषि को दीर्घकालिक रूप से लाभकारी बनाने का सशक्त माध्यम है।
विधायक ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। प्राकृतिक खेती से न केवल किसानों की लागत कम होगी, बल्कि सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादों का उत्पादन भी बढ़ेगा।
कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों एवं तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती में बाजार से महंगे रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशक खरीदने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे खेती की लागत न्यूनतम हो जाती है। देसी गाय के गोबर एवं गोमूत्र से तैयार जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत तथा नीमास्त्र जैसे जैविक उत्पाद मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाते हैं और फसलों को प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी में केंचुओं एवं सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ती है, जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है तथा भूमि की उत्पादक क्षमता लंबे समय तक बनी रहती है। कार्यशाला के दौरान प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से उनकी उत्पादन लागत में कमी आई है और आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मंजू सिंह, देव कुमार सिंह चौहान, उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास आर.एस. गुप्ता, कृषि विज्ञान केंद्र सीधी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस.एस. गौतम, अन्य विभागीय अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, कृषि सखियां तथा बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।
कार्यशाला के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक पद्धतियों, आर्थिक लाभों एवं पर्यावरणीय महत्व से अवगत कराया गया। कार्यक्रम ने जिले में प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन का स्वरूप देने तथा किसानों को टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि प्रणाली की ओर प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
