वसई-विरार में अवैध निर्माणों का बड़ा खेल, ईडी जांच की उठी मांग

राजनेताओं, बिल्डरों और अधिकारियों के गठजोड़ पर गंभीर आरोप, करोड़ों की रिश्वतखोरी का दावा

(वसई-विरार/मुंबई) वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVCMC) के अंतर्गत चिंचोटी (लोहारपाड़ा), चिंचोटी (गवळीपाड़ा), राजावली एवं वालीव क्षेत्रों में अवैध निर्माणों और कब्जों के पीछे कथित रूप से राजनेताओं, बिल्डरों तथा कुछ नागरिक अधिकारियों के बड़े सिंडिकेट (कार्टेल) के सक्रिय होने के आरोप सामने आए हैं। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग उठने लगी है।

अवैध निर्माणों को संरक्षण देने के आरोप
सूत्रों के अनुसार, सर्वे नंबर 61, 73, 75, 56 सहित विभिन्न भूखंडों पर वर्षों से अवैध निर्माण और कब्जे किए जाते रहे हैं। आरोप है कि इन निर्माणों को संरक्षण देने के बदले करोड़ों रुपये की अवैध वसूली और रिश्वतखोरी का खेल चलता रहा। स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण मिलने के कारण ऐसे निर्माणों पर लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।

37 हजार वर्गफुट अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर
महानगरपालिका आयुक्त एवं अतिरिक्त आयुक्त के निर्देश पर 18 मई 2026 को प्रभाग समिति ‘जी’ वालीव क्षेत्र में व्यापक अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया। भारी पुलिस बल और जेसीबी मशीनों की मदद से लगभग 37,000 वर्गफुट क्षेत्र में फैले अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया।

इन क्षेत्रों में हुई कार्रवाई
ससुनवघर (सर्वे नंबर 173) में वॉल्टन होटल के पीछे बने 21,000 वर्गफुट के दो अवैध पत्राशेड गोदाम जमींदोज किए गए।

चिंचोटी (लोहारपाड़ा) सर्वे नंबर 48 में 900 वर्गफुट के तीन अवैध कमरों को तोड़ा गया।

सर्वे नंबर 56 में 600 वर्गफुट के दो कमरे तथा 5,250 वर्गफुट क्षेत्र में बने 21 अवैध प्लींथ हटाए गए।

सर्वे नंबर 50 एवं 51 में 5,500 वर्गफुट के 22 अवैध प्लींथ ध्वस्त किए गए।

चिंचोटी (गवळीपाड़ा) सर्वे नंबर 69 में 3,750 वर्गफुट क्षेत्र में बने 15 अवैध प्लींथ पर कार्रवाई की गई।

अधिकारियों की मौजूदगी में चला अभियान
कार्रवाई के दौरान प्रभाग समिति ‘जी’ वालीव के सहायक आयुक्त निलेश म्हात्रे, अतिक्रमण विभाग प्रमुख मनोज घरत, कनिष्ठ अभियंता मयुरेश पाटिल सहित महानगरपालिका के अधिकारी, कर्मचारी एवं मजदूर बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

ईडी जांच से खुल सकते हैं कई राज
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि अवैध निर्माणों के पूरे नेटवर्क और कथित वित्तीय लेन-देन की जांच ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए तो करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार, राजनीतिक संरक्षण और अधिकारियों की भूमिका से जुड़े कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है और निष्पक्ष जांच की मांग लगातार जोर पकड़ रही है।

✍️ संजीव भागीरथी पांडे
            महाराष्ट्र प्रमुख
    RPKP INDIA NEWS

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