अक़ीदत और एहतराम के साथ मनाई गई एक शाम शहीदाने कर्बला के नाम उमड़ा अवाम का सैलाब
(कैमोर) शोहदा-ए-कर्बला की मुक़द्दस याद में अमरैयापार बस स्टैंड कैमोर में एक अज़ीमुश्शान ‘महफ़िल-ए-शहीदी कव्वाली’ का बा-अदब और पुरअसर आयोजन किया गया। एक शाम शहीदाने कर्बला के नाम शीर्षक से सजे इस रूहानी कार्यक्रम में अक़ीदतमंदों ने भारी तादाद में शिरकत कर इमाम हुसैन और कर्बला के जांबाज़ शहीदों की बारगाह में अपनी अक़ीदत और मोहब्बत के नज़राने पेश किए।

हलीम ताज की कव्वाली ने मोहा सबका मन
कार्यक्रम की मुख्य कशिश जबलपुर के सुप्रसिद्ध कव्वाल जनाब हलीम ताज रहे। उन्होंने अपनी मख़सूस आवाज़ और शानदार कलामों से समां बांध दिया। उन्होंने जब कर्बला के वाकयात और शहादत के मंज़र को अपने अलफ़ाज़ों में पिरोकर पेश किया, तो पंडाल में मौजूद हर आंख नम हो गई और लोग झूमने पर मजबूर हो गए।
लंगर-ए-हुसैनी का हुआ विशेष एहतमाम
इंजीनियर नवाब ख़ान साहब की ज़ेरे-सरपरस्ती में आयोजित इस महफ़िल को कामयाब बनाने में दर्द-ए-हुसैन लंगर कमेटी अमरैयापार कैमोर
का विशेष योगदान रहा। ज़िक्र-ए-शहादत की इस महफ़िल के साथ-साथ कमेटी की जानिब से बड़े पैमाने पर लंगर-ए-हुसैनी का माकूल एहतमाम भी किया गया था, जहाँ हज़ारों की संख्या में आए ज़ायरीन और आम जनता ने तबर्रुक हासिल किया।
अक़ीदतमंदों ने पेश की अकीदत
28 जून 2026 की शाम आयोजित हुए इस जलसे में कैमोर और आसपास के इलाक़ों से भारी संख्या में लोगों ने तशरीफ़ लाकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। कव्वाली का यह रूहानी सिलसिला देर रात तक चलता रहा। कार्यक्रम को सफल बनाने में दर्द-ए-हुसैन लंगर कमेटी के सभी अराकीन और स्थानीय युवाओं का सराहनीय योगदान रहा
✍️ सुनील सिंगोते
RPKP INDIA NEWS
कैमोर
