राज्य वित्त आयोग की अनुशंसाओं के लिए जमीनी सुझाव महत्वपूर्ण : अध्यक्ष श्री पवैया

संभागीय समीक्षा बैठक में राजस्‍व बढ़ाने के दिये गये सुझाव, नवाचारों पर की गई चर्चा  

(जबलपुर)   छठवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि 73वें एवं 74वें संविधान संशोधन के तहत गठित राज्य वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसका उद्देश्य पंचायतों एवं नगरीय निकायों को वित्तीय संसाधनों का निष्पक्ष एवं पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि आयोग अगले पांच वर्षों के लिए अपनी अनुशंसाएं तैयार कर रहा है, जिनके आधार पर राज्य की संचित निधि से स्थानीय निकायों को दिए जाने वाले अनुदान का निर्धारण किया जाएगा।अध्यक्ष श्री पवैया ने गुरुवार को जबलपुर कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग की संभागीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों से जिलों की वित्तीय स्थिति, अनुदान राशि के उपयोग, स्व-राजस्व वृद्धि के प्रयासों तथा स्थानीय स्तर पर किए गए नवाचारों की जानकारी प्राप्त की। श्री पवैया ने अधिकारियों से कहा कि वे केवल प्रस्तुतिकरण तक सीमित न रहें, बल्कि ऐसे सफल मॉडल भी साझा करें, जिनसे स्थानीय निकायों ने स्वयं आय अर्जित की हो।

राज्य वित्त आयोग की बैठक में संभागायुक्त धनंजय सिंह सहित सभी जिलों के कलेक्टर, जिला मुख्‍यालयों के नगर निगम के आायुक्‍त एवं नगर पालिका परिषदों के मुख्‍य नगर पालिका अधिकारी और जिला पंचायत के सीईओ ने स्थानीय निकायों की आय बढ़ाने, वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने और आधारभूत विकास कार्यों को गति देने के लिए अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

बैठक में राजस्व बढ़ाने, जीआईएस आधारित संपत्ति सर्वे, पर्यटन विकास, जल जीवन मिशन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सौर उर्जा और वित्त आयोग की राशि के बेहतर उपयोग पर विशेष चर्चा हुई।

जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बैठक में बताया कि जिले की पंचायतों का राजस्व संग्रह लगातार बढ़ रहा है। पंचायत लेखा पोर्टल के माध्यम से 40 हजार से अधिक हितधारकों से संपर्क कर आयकर वसूली की गई। जल जीवन मिशन के अधिकांश कार्य पूर्ण हो चुके हैं तथा 143 ग्राम पंचायतों में योजनाओं के हस्तांतरण की प्रक्रिया जारी है।

नगर निगम जबलपुर के आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने अपना प्रस्तुतिकरण देते हुए बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में निगम की आय 670 करोड़ और व्यय 732 करोड़ रुपये रहा। संपत्ति कर संग्रहण में लक्ष्य का 129 प्रतिशत हासिल कर करीब 113 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया गया। निगम ने पीपीपी मॉडल, रानीताल गार्डन क्षेत्र का पुनर्विकास और स्टाम्प ड्यूटी में स्थानीय निकायों की हिस्सेदारी बढ़ाने जैसे सुझाव आयोग के समक्ष रखे।

बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना ने पंचायतों में जीआईएस आधारित डिजिटल प्रॉपर्टी सर्वे कराने, स्वामित्व योजना का विस्तार करने तथा राज्य स्तर पर तकनीकी एजेंसी गठित करने का सुझाव दिया।

छिंदवाड़ा कलेक्टर हरेन्‍द्र नारायन ने बताया कि जिले में सीवरेज एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन के कार्य जारी हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए छिंदवाड़ा जिले में 100 होम-स्टे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था, जिनमें से 60 होम-स्टे तैयार हो चुके हैं। विशेष रूप से तामिया और आसपास के पर्यटन क्षेत्रों में होम-स्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है। छिंदवाड़ा कलेक्टर ने कहा कि पातालकोट सहित जिले के इको-टूरिज्म क्षेत्रों में ट्रैकिंग, कैंपिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स की अपार संभावनाएं हैं। इन गतिविधियों को बढ़ावा देकर पंचायतों की आय में वृद्धि की जा सकती है।

पांढुर्ना कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्‍ठ ने बताया कि जामसांवली स्थित भगवान हनुमान मंदिर के विकास के बाद क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ा है। मंदिर परिसर की पार्किंग से ही लगभग 17 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने एमपी टूरिज्म के सहयोग से जामसांवली, धूमा और अन्य गांवों में होम-स्टे विकसित करने का प्रस्ताव रखा। श्री वशिष्‍ठ ने कहा कि पांढुर्ना की पहचान संतरा उत्पादन और इको-टूरिज्म से है। इन दोनों क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाये तो स्थानीय निकायों की आय और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

डिंडोरी कलेक्टर अंजू भदौरिया ने बेहतर कर संग्रह करने वाली पंचायतों को प्रोत्साहन राशि देने, बंद शासकीय परिसंपत्तियों के उपयोग, पर्यटन संभावनाओं वाली पंचायतों को विशेष वित्तीय सहायता और नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर आधारभूत सुविधाएं विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने हल्दी करेली टूरिस्ट स्पॉट के बारे जानकारी देते हुए बताया कि मिनी गोवा के नाम से पहचाने जाने वाले इस स्‍थान को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा सकता है।

कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी ने जीआईएस आधारित संपत्ति मैपिंग, ऑनलाइन कर व्यवस्था और पंचायतों की दुकानों, हाट-बाजार एवं पर्यटन स्थलों से आय बढ़ाने के उपाय बताए। साथ ही व्यावसायिक संपत्तियों पर कर दरों के पुनरीक्षण, पंचायत परिसंपत्तियों के विकास, पीपीपी मॉडल और औद्योगिक, माईनिंग क्षेत्रों से प्राप्त करों में स्थानीय निकायों की हिस्सेदारी बढ़ाने का सुझाव दिया।

नरसिंहपुर कलेक्टर रजनी सिंह ने बरमान घाट जैसे बड़े धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों वाली पंचायतों के लिए विशेष वित्तीय सहायता, अतिरिक्त मानव संसाधन और स्थायी आधारभूत ढांचा विकसित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही तेजी से विकसित हो रहे ग्रामीण क्षेत्रों को आवश्यकतानुसार नगरीय निकाय बनाने पर भी विचार रखने का सुझाव दिया।

सिवनी कलेक्टर नेहा मीना ने जीआईएस सर्वे के लिए अलग व्यवस्था बनाने के बजाय अन्य विभागों की सर्वे योजनाओं का समन्वित उपयोग करने, बेहतर कर संग्रह करने वाली पंचायतों को प्रोत्साहन राशि देने तथा जीआई टैग प्राप्त सीताफल के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत करने का सुझाव आयोग के समक्ष रखा।

मंडला कलेक्टर राहुल धोटे ने बैठक में अपने सुझाव देते हुए कहा कि मंडला जिले में टूरिज्म की काफी संभावनाएं हैं। उन्‍होंने कहा कि कान्हा जैसे पर्यटन स्थल में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए होम स्टे की सुविधा शुरू की जा सकती है।

बैठक में आयोग के अध्‍यक्ष श्री पवैया ने कहा कि आयोग प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए कुछ अनिवार्य विकास मॉडल निर्धारित करने पर विचार कर रहा है, ताकि सभी पंचायतों में न्यूनतम आधारभूत सुविधाएं एवं जनकल्याणकारी कार्य समान रूप से सुनिश्चित हो सकें। उन्होंने सौर ऊर्जा परियोजनाओं, गोशालाओं तथा अन्य आय सृजनात्‍मक गतिविधियों और नवाचारों को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। अध्यक्ष श्री पवैया ने कहा कि सभी जिलों से प्राप्त सुझावों एवं अनुभवों के आधार पर आयोग अपनी अनुशंसाएं तैयार करेगा, जिससे स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से अधिक सशक्त बनाया जा सके।

श्री पवैया ने पंचायतों में सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग पर भी विशेष जोर देते हुए कहा कि स्ट्रीट लाइट, पेयजल आपूर्ति तथा अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को चरणबद्ध तरीके से सौर ऊर्जा आधारित बनाया जाना चाहिए। जिन पंचायतों में इस दिशा में सफल मॉडल विकसित हुए हैं, उन्हें अन्य पंचायतों में भी लागू करने पर विचार किया जाएगा।

आयोग के अध्यक्ष ने श्मशान घाटों की उपलब्धता एवं वहां तक पहुंच को भी महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने कहा कि जिन ग्राम पंचायतों में दूरस्थ गांवों के लोगों को श्मशान घाट तक पहुंचने में कठिनाई होती है, वहां सर्वे कर आवश्यकतानुसार अतिरिक्त श्मशान घाट अथवा पहुंच मार्ग विकसित किए जाने पर विचार किया जाएगा।

श्री पवैया ने कहा कि अगले पांच वर्षों में प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप दो से तीन विकास मॉडल अनिवार्य रूप से लागू करने की दिशा में आयोग अनुशंसाएं तैयार करेगा। साथ ही पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए बाजार, दुकानों एवं अन्य आय सृजनात्‍मक गतिविधियों को बढ़ावा देने, पंचायतों को भूमि उपलब्ध कराने, आवश्यक नियमों में व्यावहारिक सुधार करने तथा जिला कलेक्टरों के अधिकारों का प्रभावी उपयोग कर संसाधन विकसित करने जैसे विषयों पर भी विचार किया जा रहा है।

बैठक के समापन पर अध्यक्ष श्री पवैया ने अधिकारियों से आग्रह किया कि यदि कोई महत्वपूर्ण सुझाव बैठक में प्रस्तुत नहीं हो पाया हो, तो उसे लिखित रूप में आयोग को उपलब्ध कराएं, ताकि अंतिम अनुशंसाओं में उन सुझावों को भी शामिल किया जा सके।

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