फसलों में रोग नियंत्रण के लिये कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह

कटनी  कलेक्टर शशिभूषण सिंह के निर्देशानुसार मंगलवार को बहोरीबंद तहसील के ग्राम जुजावल, बडखेरा, नीमखेड़ा सहित विभिन्न गांवों में कृषि अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों के दल ने भ्रमण कर धान की फसलो का निरीक्षण किया और किसानों को फसलों में रोग नियंत्रण के लिए सलाह और परामर्श दिया। उप संचालक कृषि ए0 के0 राठौर ने जिले के किसानों को धान की फसलो को रोग से बचाने सामयिक सलाह दी है। इसके अनुसार इस समय धान की फसलों में कहीं-कहीं गभोट की अवस्था पर कहीं पर बालियां निकल गई हैं। पिछले वर्ष जिले में धान की इस अवस्था में अभासी कण्डवा (फाल्स स्मट) रोग देखा गया था। जिसमें बाली में दानों के स्थान पर गुलाबी संरचना बनकर उभर आई थी। इस रोग का प्रबंधन शुरुआत से ही करने के लिये कहा गया है। इसके लिये जैसे ही धान गलेथ में आये प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत, फफूंदनाशी 1 एमएल प्रति लीट (200 एमएल प्रति एकड़) की दर से छिड़काव करने के लिये कहा गया है। जब बलियां 50 प्रतिशत फूल अवस्था में हो तब टेबुकोनाजोल 25.9 प्रतिशत का 1.25 एमएल प्रति लीटर (250 एमएल प्रति एकड़) अथवा ट्राईसाईक्लाजोल 75 प्रतिशत 0.6 ग्राम प्रति लीटर (120 ग्राम प्रति एकड़) अथवा हैक्जोकोनाजोल 5 प्रतिशत का 2 एमएल प्रति लीटर (400 एमएल प्रति एकड़) अथवा एजोक्सीस्ट्राबीन और डाईफेनोकोनाजोल (200 एमएल प्रति एकड़) की दर से प्रयोग करने की सलाह किसानों को दी गई है।

            इसके साथ ही धान के खेत गंधी कीट, भूरा माहू एवं तना भेदक कीट से भी प्रभावित देखे जा रहे हैं। गंधी कीट दुग्धा अवस्था में दानों का रस चूस लेता है। जिससे दानों का रंग भूरा सफेद हो जाता है। इसके नियंत्रण के लिर्ये िफप्रोनिल 5 प्रतिशत 300 एमएल प्रति एकड़ अथवा थायमेथोक्साम (12.6) के साथ लम्बडासायहैलोथ्रिन (9.5) जेडसी 125 एमएल प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी के साथ फसल पर छिड़काव करने के लिये कहा गया है।

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