कटनी जिले के कृषि रकबे में बढ़ रही गन्ने की मिठास

कटनी

पिछले तीन सालों में 3 गुनी वृद्धि से रकबा हुआ 500 एकड़

कटनी जिले में खरीफ और रबी की मुख्य फसलों के अलावा गन्ने की फसल भी अपना वजूद बना रही है। जिले में 3 साल पहले ढीमरखेड़ा क्षेत्र के सिलौंड़ी, अतरसूमा और कछार गांव के कुछ किसानों ने लगभग 150 हैक्टेयर क्षेत्र में गन्ना लगाना शुरु किया। गन्ने की फसल से होने वाली आय और कम मेहनत को देखते हुये किसानों ने अपने खेतों में गन्ना की फसल लेना शुरु किया और वर्तमान में ढीमरखेड़ा क्षेत्र के किसान लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में गन्ने की फसल ले रहे हैं।

ढीमरखेड़ा विकासखण्ड के सिलौंड़ी के युवा कृषक कमलेश हल्दकार बताते हैं कि तीन साल पहले गन्ने की 1008 करेली किस्म लगाई थी। इस साल उनके तीनों भाई 70-80 एकड़ में गन्ने की फसल ले रहे हैं और शेष भूमि में धान और चने की फसल लेते हैं। ढीमरखेड़ा क्षेत्र में कमलेश हल्दकार ने 12 हैक्टेयर, अतरसूमा के किसान रावेन्द्र ने 16 हैक्टेयर, सिलौंड़ी के रामनरेश ने 12 हैक्टेयर, प्रदीप और आशीष ने 10-10 हैक्टेयर, कंठीलाल ने 8 हैक्टेयर और उमेश कुमार ने 10 हैक्टेयर पर गन्ने की फसल लगाई है।

कृषक कमलेश हल्दकार बताते हैं कि गन्ने की फसल लेने वाले बड़े किसानों ने खुद की गन्ना की पिराई मशीन और गन्ने के रस से गुड़ बनाने की व्यवस्था परम्परागत रुप से गांव में ही कर रखी है। रस को उबालकर गुड़ बनाने के प्लान्ट में रस की सफाई के लिये किसी केमिकल या वस्तु का प्रयोग नहीं किया जाता। इसलिये इनके गुड़ का रंग डार्क रहता है। एक एकड़ के गन्ने से एक साल में 30- 35 क्विंटल गुड़ तैयार होता है। जिसे कटनी, सिलौंड़ी, पान उमरिया के स्थानीय व्यापारी 2500 रुपये से 3 हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीद कर ले जाते हैं। सिलौंड़ी के गन्ना कृषक रामनरेश ने बताया कि गन्ने की फसल एक एकड़ में 50 से 60 हजार रुपये का मुनाफा दे जाती है। धान और गेहूं की खेती से गन्ने की फसल में कम मेहनत लगती है। जनवरी माह में एक बार फसल की बुवाई के बाद मई माह तक ग्रीष्म काल में 5 से 6 बार सिंचाई करनी होती है। इसके बाद गन्ने की फसल तीन साल तक सिंचाई के अलावा बिना कुछ किये आमदनी देती है।

एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड योजना के तहत संभावनाओं को तलाशने क्षेत्र भ्रमण पर निकले उप संचालक कृषि ए0के0 राठौर ने बताया कि ढीमरखेड़ा क्षेत्र में सिलौंड़ी, अतरसूमा, कछार गांव के किसानों द्वारा लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में गन्ने की फसल ली जा रही है। किसानों ने गन्ने के रस से गुड़ बनाने के परम्परागत प्लान्ट लगाये हैं। जिले में एगीकल्चर इन्फ्रस्ट्रक्चर फण्ड योजना के तहत गन्ना क्षेत्र विस्तार और गन्ना किसानों को आधुनिक कृषि उत्पादन और गुड़ बनाने के आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने के प्रयास किये जायेंगे।

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