मुख्य धारा में लाने बच्चों को दें सुरक्षित और अपनत्व भरा माहौल – कलेक्टर

वन स्टॉप सेन्टर और जिला बाल संरक्षण समिति की बैठक सम्पन्न

कटनी – अपने घर-परिवार से दूर रह रहे बाल संरक्षण गृह के बच्चों को मुख्य धारा में लाने के लिये सुरक्षित और अपनत्व भरा अनुकूल माहौल उपलब्ध करायें। इस आशय के निर्देश कलेक्टर शशिभूषण सिंह ने जिला बाल संरक्षण समिति की बैठक में वन स्टॉप सेन्टर और बाल आश्रय गृहों की गतिविधियों की समीक्षा के दौरान दिये। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग नयन सिंह, सहायक संचालक एवं महिला सशक्तिकरण अधिकारी वनश्री कुर्वेति, जिला संयोजक जनजातीय विभाग सरिता नायक, आश्रय गृह और वन स्टॉप सेन्टर के संचालक मौजूद रहे।

कलेक्टर श्री सिंह ने जिले में संचालित बाल देख-रेख संस्थाओं में रह रहे बच्चों की शिक्षा-दीक्षा, दैनिक गतिविधियों एवं शारीरिक मानसिक विकास के संबंध में किये जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होने कहा कि बाल संरक्षण गृहों में रह रहे बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, मनोरंजन, खेलकूद की गतिविधियों के साथ ही सुरक्षित माहौल में उन्हें मुख्य धारा में लाने तथा उनके परिवार में वापस भेजने के लिये अनुकूल माहौल तैयार करने के सतत् प्रयास किये जायें। कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित और अपनत्व का माहौल देकर उन्हें रचनात्मक और सृजनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखें। कोविड-19 संक्रमण काल में बाल संरक्षण गृहों में विशेष सावधानी और सतर्कता रखें।

जिला कार्यक्रम अधिकारी नयन सिंह ने बताया कि जिले की 4 बाल देखरेख संस्थाओं आशा किरण बाल गृह, आसरा बाल गृह, लिटिल स्टार फाउन्डेशन बालिका गृह, किलकारी शिशु गृह में कुल 113 निवासरत बच्चों की देखरेख की जा रही है। सभी संस्थाओं में सैनीटाईजर, मास्क का प्रयोग कर नियमित रुप से सैनीटाईजेशन किया जा रहा है। संस्थाओं में किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश सख्त प्रतिबंधित किया गया है और विभागीय अधिकारियों द्वारा संस्थाओं का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। कोरोना काल में विद्यालय बंद होने के कारण ऑनलाईन क्लासेस के माध्यम से शिक्षा दी जा रही है। पिछले माह एक समाचार पत्र समूह द्वारा आसरा बाल गृह को स्कूल बैग तथा शिक्षण सामग्री का प्रदाय भी किया गया है।

वन स्टॉप सेन्टर की जानकारी में महिला सशक्तिकरण अधिकारी वनश्री कुर्वेति ने बताया कि वनस्टॉप सेन्टर का संचालन माधवनगर स्थित स्वयं के भवन में किया जा रहा है। वनस्टॉप सेन्टर के माध्यम से फरवरी 2016-17 से अब तक 317 पीडि़त महिलाओं के प्राप्त प्रकरणों में 134 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है। वनस्टॉप सेन्टर में पीडि़त महिलाओं को 5 दिन का आश्रय मेडिकल, लीगल एवं अन्य कौशलिंग सुविधा प्रदान की जाती है।

संरक्षण गृह के बच्चों ने दिये स्वनिर्मित गिफ्ट

जिला बाल संरक्षण समिति की बैठक में बाल संरक्षण गृह आशाकिरण के बच्चों ने अपने हाथों से तैयार किये गये दीपावली के ग्रीटिंग कार्ड, कलश, सजावटी गमला और कैंडिल सैट कलेक्टर शशिभूषण सिंह को भेंट किये। महिला सशक्त्किरण अधिकारी वनश्री कुर्वेति ने बताया कि बाल संरक्षण गृह के बच्चों द्वारा रचनात्मक कौशल के तहत विविध कलाकृतियां एवं कलात्मक सामग्रियों का निर्माण भी किया जायेगा।

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