आजीविका मिशन के स्वसहायता समूह बढ़ा रहे आत्मनिर्भरता की ओर कदम


कलेक्टर ने ग्रामीण क्षेत्र के भ्रमण के दौरान गतिविधियों का किया निरीक्षण

कटनी –

कटनी जिले में आजीविका मिशन के महिला स्वसहायता समूह उद्यानिकी की पौध नर्सरी और फूड प्रोसेसिंग की छोटी-छोटी इकाईयों के माध्यम से अपने आय में बढ़ोतरी कर आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। कलेक्टर शशिभूषण सिंह ने शुक्रवार को बडवारा और बहोरीबंद क्षेत्र के भ्रमण के दौरान ग्रामीण विकास कार्यों के साथ ही महिला स्वसहायता समूहों द्वारा पौध नर्सरी तैयार करने और खाद्य प्रसंस्करण की ली गई गतिविधियों का मौके पर निरीक्षण किया। इस मौके पर सीईओ जिला पंचायत जगदीश चन्द्र गोमे, एसडीएम बहोरीबंद रोहित सिसोनिया, जनपद सीईओ बड़वारा ज्ञानेन्द्र मिश्रा, जनपद सीईओ बहोरीबंद मीना कश्यप, एलडीएम उद्यम वानरा, उद्यानिकी अधिकारी सूर्यभान सिंह, जिला परियोजना प्रबंधक आजीविका मिशन शबाना बेगम सहित विभागों के मैदानी अधिकारी उपस्थित थे।

कलेक्टर श्री सिंह ने मनरेगा से आजीविका मिशन स्वसहायता समूहों द्वारा विकसित की जा रही शासकीय उद्यान खिरहनी और बड़वारा की पौध नर्सरी का निरीक्षण किया। बातचीत के दौरान शिवशक्ति महिला स्वसहायता समूह के सदस्यों ने कलेक्टर को बताया कि नर्सरी के माध्यम से कोरोना काल और लॉकडाउन में भरपूर रोजगार मिला और नर्सरी में आम, खम्हेर, जामुन, अशोक, कटहल के 12 हजार 100 पौधे तैयार भी हो रहे हैं। बड़वारा नर्सरी के निरीक्षण के दौरान दुर्गा स्वसहायता समूह की अध्यक्ष रोशनी ने बताया कि समूह के 15 सदस्य मिलकर नर्सरी में कटहल, जामुन, कंजी, अशोक, नीम, आम के लगभग 25 हजार पौधे तैयार कर रहे हैं। कलेक्टर श्री सिंह ने महिला स्वसहायता समूहों के परिश्रम की सराहना करते हुये प्रोत्साहन दिया। उन्होने उद्यानिकी विभाग और जिला पंचायत के अधिकारियों को नर्सरी में सिंचाई की सुविधा के लिये अलग से ट्यूबबेल कराने, तैयार पौधे के विक्रय के लिये विक्रय केन्द्र सह गार्डरुम का भवन शीघ्र निर्मित करने के निर्देश दिये। उन्होने महाप्रबंधक उद्योग को निर्देशित किया कि वृक्षारोपण के लिचे वांछित पौधों का क्रय इन्ही नर्सरियों से करायें तथा अन्य विभाग भी आवश्यकता अनुसार पौधे यहीं से क्रय करेंगे। एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड योजना में पैक हाउस एवं प्याज समूह केन्द्र, कम्पोस्ट खाद तैयार करने महिला स्वसहायता समूहों के प्रकरण बनाने के निर्देश भी दिये।

तेवरी में स्वसहायता समूहों ने पॉपकॉर्न और मसाला उद्यम अपनाया

बहोरीबंद विकासखण्ड के तेवरी ग्राम पहुंचे कलेक्टर शशिभूषण सिंह ने तेवरी के हाट बाजार की दुकानों में महिला स्वसहायता समूहों द्वारा स्थापित पॉपकॉर्न बनाने और मसाला बनाने की इकाईयों का भी निरीक्षण किया। उन्होने नवस्थापित इकाईयों का शुभारंभ भी किया।

आजीविका मिशन के पूजा स्वसहायता समूह तेवरी ने पूजा पॉपकॉर्न सेन्टर चालू किया है। जिसमें शासकीय सहायता से 71 हजार रुपये लागत की मक्के से पॉपकॉर्न तैयार करने की मशीन लगाई है। इसी प्रकार आत्मनिर्भर कटनी के अन्तर्गत मां अम्बे स्वसहायता समूह तेवरी की महिलाओं ने 91 हजार रुपये की लागत से मसाला पीसने वाली आधुनिक मशीन स्थापित कर मां अम्बे मसाला सेन्टर संचालित किया जा रहा है। स्वसमूहों की महिलाओं ने बताया कि बंडा, तेवरी, स्लीमनाबाद क्षेत्र में धनिया, हल्दी मसाले की पर्याप्त फसल होती है। इसलिये कच्चे माल की कोई कमी नहीं है। तैयार मसाले मध्यान्ह भोजन समूहों को विक्रय किया जायेगा। इसके अलावा पैकेजिंग मशीन लगाकर बाजार क्षेत्र में भी सप्लाई किया जायेगा। तेवरी में इन दोनों समूहों के अलावा बालाजी स्वसहायता समूह तेवरी की महिलाओं ने 1 लाख 40 हजार कीमत की आलू की चिप्स बनाने की मशीन भी लगाई है। कलेक्टर श्री सिंह ने स्वसहायता समूहों की महिलाओं से रुबरु चर्चा कर उद्यमी गतिविधियों की जानकारी ली और उन्हें प्रोत्साहित किया। उन्होने स्वसहायता समूहों की महिलाओं को नियमित रुप से बैठक करने, रिकॉर्ड कीपिंग करने और ग्राम सभा की बैठक में समूह की आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत कर सोशल ऑडिट भी कराने की सलाह दी।

आदर्श ग्राम बंडा में मसाला पिसाई मशीन का शुभारंभ

सांसद आदर्श ग्राम बंडा में आजीविका मिशन के स्वसहायता समूह जैविक रुप से कृषि, उद्यानिकी के अलावा मसाले की खेती की ओर अग्रसर हैं। बंडा की जागृति स्वसहायता समूह की महिलाओं ने ग्राम पंचायत परिसर की हाट बाजार में मसाला पीसने और पैक करने की इकाई भी लगाई है। कलेक्टर शशिभूषण सिंह ने इकाई में स्थापित आधुनिक मसाला पिसाई चक्की का बटन दबाकर शुभारंभ किया। स्वसहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि गांव में टमाटर, आलू के अलावा हल्दी, धनिया, अदरक, प्याज की जैविक खेती बडी मात्रा में हो रही है। गीले मसाले, गीली दाल पीसने तथा अदरक का पाउडर बनाने की मशीन लगाने की योजना है। कलेक्टर श्री सिंह ने खाद्य प्रसंस्करण की छोटी-छोटी इकाईयों को आवश्यक प्रमाणीकरण संस्थाओं में पंजीयन कराने, गीले मसालों के लिये ड्रायर इकाई, जैविक उत्पादन और मसालों की पैकेजिंग तथा एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड की तय गतिविधियों के अनुरुप बंडा ग्राम की स्वसहायता समूहों को जैविक खेती, जैविक खाद एवं प्रॉडक्ट के विपणन, पैकेजिंग के प्रस्ताव बनाने के निर्देश अधिकारियों को दिये।

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