भूमिहीन संतोष को वनाधिकार पत्र ने बनाया भू-स्वामी (सफलता की कहानी ) –
( रीवा )
हर व्यक्ति अपने तथा अपने परिवार के लिए थोड़ी सी भूमि और छोटे से घर की सुविधा चाहता है। बरसों से वन भूमि पर खेती करके अपनी आजीविका चला रहे लाखों गरीब तथा भूमिहीन अनुसूचित जनजाति परिवारों को वनाधिकार अधिनियम ने भूमि का स्वामी बना दिया है। ऐसे ही भूमिहीन से भू-स्वामी बने हितग्राही रीवा जिले के संतोष कोल है। जो अपनी पत्नी तथा तीन बच्चों के साथ गंगेव विकासखण्ड के ग्राम सरईकला में रहते हैं। उन्हें वनाधिकार पत्र ने भूमिहीन से भू-स्वामी बना दिया है।
संतोष कोल तथा उनका परिवार पिछले 40 वर्षों से वनभूमि पर खेती कर रहा है। जमीन का छोटा सा टुकड़ा उनकी आजीविका का आधार है। उन्होंने 2008 में ग्राम सभा के माध्यम से वनाधिकार पत्र के लिए दावा दर्ज कराया था। उनके दावे के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण न मिलने से सह दावा अमान्य कर दिया गया। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की विशेष पहल पर सभी अमान्य दावों को वनमित्र पोर्टल पर दर्ज कराया गया। नवीन प्रावधानों के अनुसार संतोष के वनाधिकार दावें को मान्यता मिली अब संतोष को उस जमीन का वनाधिकार पत्र मिल गया है जिस पर वे बरसों से खेती कर रहे थे। अब पूरे हक के साथ अपने खेत की फसल बेचेंगे।

