टीकाकरण के बाद की प्रतिकूल घटनायें 99 प्रतिशत टीके से संबंधित नहीं
जिलास्तरीय एईएफआई कार्यशाला सम्पन्न
कटनी – टीकाकरण के बाद उत्पन्न होने वाली प्रतिकूल घटनायें 99 प्रतिशत प्रकरणों में टीके के प्रभाव से संबंधित नहीं होती है। इस आशय की जानकारी कलेक्टर शशिभूषण सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न टीकाकरण और उसके बाद की उत्पन्न प्रतिकूल घटनाओं के निदान संबंधी जिलास्तरीय ए.ई.एफ.आई की कार्यशाला में दी गई। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रदीप मुढि़या, सिविल सर्जन डॉ. यशवंत वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग नयन सिंह, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. समीर सिंघई, महामारी विशेष डॉ. राशि गुप्ता, डीपीएम घनश्याम मिश्रा, डब्लयूएचओ प्रतिनिधि डॉ. अभिषेक बछौतिया सहित बीएमओ एवं टीकाकरण संबंधी स्वास्थ्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।
कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि कटनी जिले में सम्पूर्ण टीकाकरण का प्रतिशत 86 प्रतिशत है। हर संभव प्रयास कर टीकाकरण का प्रतिशत 95 प्रतिशत से अधिक रखें। उन्होने कहा कि टीकाकरण के प्रति लोगों में जागरुकता के कार्यक्रम सतत् रुप से किये जाने चाहिये। कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि निकट भविष्य में कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव का भी टीकाकरण कार्यक्रम बड़े पैमाने पर लिया जाना संभावित है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम, आशा एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता को मिशन मोड में टीकाकरण कार्य संपादित करने की मानसिकता विकसित करें और धनात्मक वातावरण का निर्माण करें।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से प्रतिनिधि डॉ. अभिषेक बछौतिया ने टीकाकरण के बाद की उत्पन्न प्रतिकूल घटनाओं, परिस्थितियों के कारण निदान की जानकारी पावर पॉईन्ट प्रेजेन्टेशन के माध्यम से देते हुये बताया कि आमतौर पर टीकाकरण के बाद उत्पन्न प्रतिकूल घटनायें अथवा तथाकथित दुष्प्रभाव वास्तविक रुप से 99 प्रतिशत टीकाकरण से संबंधित नहीं होते हैं। टीकाकरण के प्रति विपरीत मानसिकता, भय और पूर्वागृह से पीडि़त व्यक्तियों को शारीरिक परिवर्तन की घटनायें होती हैं। वस्तुतः यह टीका के प्रभाव से नहीं होती है। उन्होने बताया कि टीकाकरण के बाद की प्रतिकूल परिस्थितियों को तीन श्रेणियों माईनर, सीवियर और सीरियस में बांटा गया है। इनमें माईनर में किसी देखरेख की आवश्यकता नहीं होती। सीरियस इफेक्ट को अस्पताल में भर्ती कर इलाज की जरुरत होती है। उन्होने कहा कि टीकाकरण के बाद प्रतिकूल परिस्थितियां होने पर स्वास्थ्य कार्यकर्ता को तत्काल मेडिकल ऑफीसर के संज्ञान में लाना चाहिये। मेडिकल ऑफीसर तत्काल केस को अटेण्ड कर रिपोर्टिंग फॉर्म 24 घंटे के भीतर जिला टीकाकरण अधिकारी को प्रस्तुत करेंगे। टीकाकरण के दौरान सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मेडिकल ऑफीसर को ए.ई.एफ.आई. ट्रीटमेन्ट किट भी प्रदान की जाती है।

