ब्रेकिंग न्यूज़ : यह क्या बोल गए जिले के कलेक्टर, अधिकारियो और कर्मचारियों में यह कैसा भेदभाव ..?

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कलेक्टर का फरमान सुनकर गरीबों के उड़े होश

(भोपाल) मध्यप्रदेश के कटनी जिले के अधिकारी निरंतर सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं। आपको बता दें कि कलेक्टर प्रियंक मिश्रा जो की कटनी जिले के कलेक्टर है, उनके द्वारा अधिकारी और कर्मचारियों में भेदभाव करने का मामला सामने आया है। यह मामला जब मद्देनजर सामने आया जब कलेक्टर प्रियंक मिश्रा विजयराघवगढ़ के दौरे पर आए हुए थे और उनसे मीडिया ने कैमोर मे बढ़ते कोरोना संक्रमण पर जानकारी मांगी तो उनके द्वारा कहा गया कि आफीसर को छोड़ दो और कर्मचारी को ओपन जेल मे डाल दो। जी हां, आपने सही सुना यह, कलेक्टर की यह बात सुनकर कटनी जिले के कर्मचारियों के मन में यह भावना जागृत हो गई कि कलेक्टर साहब क्या अमीर और गरीब में भेदभाव कर रहे हैं। कलेक्टर साहब को यह समझ लेना चाहिए कि वह कलेक्टर की पदवी में बैठे हैं और उनको पूरे जिले को देखना है। उनको यह बात भी समझ लेना चाहिए कि कलेक्टर अमीर और गरीब का नहीं होता, अधिकारियों और कर्मचारियों का नहीं होता वह जनता का होता है। जनता के बीच एक प्रशासनिक अधिकारी का इस प्रकार भेदभाव करना यह बात दर्शाता है कि क्या कहीं ना कहीं एसीसी से कलेक्टर को विशेष लाभ मिल रहा है। कलेक्टर साहब यहां नहीं रुके उन्होंने यह तक कह दिया कि भारत सरकार के आदेशानुसार कम्पनी को बंद नहीं कर सकते लेकिन कोरोना की वजह से जिले को अगर हानि होती है तो उन्हें यह अधिकार दिया गया है कि वे तत्काल कंपनी बंद करवा सकते हैं ।

क्या हो रहा है माइक्रो कंटेनमेंट जोन में , नहीं पता आदेश देने वाले अधिकारी को …. !

एसीसी के मामले में यहां के प्रशासनिक अधिकारी अपने कर्तव्य को नजरअंदाज कल चुप्पी साधे बैठे रहते हैं। कलेक्टर जो कि जिले का राजा होता है, यह बात कहने में दुख हो रहा है कि जिसको हम राजा कह रहे हैं राजा के अधीनस्थ अधिकारी भी उसी की तरह बर्ताव करने लगे हैं। इंसीडेंट कमांडर प्रिया चंद्रावत जो की विजयराघवगढ़ एसडीएम है उनके बारे में तो आपने बहुत सुना होगा प्रशासनिक अधिकारी का फरवरी को 28 की जगह 30 दिन का मानकर लिखित आदेश जारी कर देना बहुत बड़ी बात होती है लेकिन यहां के प्रशासनिक अधिकारी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उनके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं की गई। अगर कलेक्टर मिश्रा के द्वारा इस विषय को संज्ञान मे लेकर उनसे 30 दिन की फरवरी का स्पष्टीकरण लिया जाता या उन पर कार्रवाई की जाती तो कहीं ना कहीं उन्हें अपनी गलती पर एहसास होता है। जनता को ताजुब तो उस वक्त हुआ जब उन्होंने मीडिया को दिये साक्षात्कार मे बताया कि एसीसी कम्पनी क्षेत्र को माइक्रो कंटेनमेंट जोन घोषित किया जा चुका है।

जब मीडिया कर्मी ने उनसे पूछा गया कि मैडम वहां तो आना-जाना निरंतर बना हुआ है तो किस बात का माइक्रो कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है तो आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे की एसडीएम प्रिया चंद्रावत ने कहा हमने परमिशन दे कर रखी है कोई भी अधिकारी गाड़ी से आ जा सकता है। इससे आपको कुछ समझ में नहीं आएगा लेकिन जब आप इसकी गहराई में जाएंगे तो आपको एक बात समझ में आ जाएगी कि एसडीएम जो कि इंसिडेंट कमांडर घोषित है उनको ही नही पता कि माइक्रो कंटेनमेंट जोन घोषित क्या होता है। आपको विदित हो कि माइक्रो कंटेनमेंट जोन का मतलब क्या होता है ? जहां कोरोना के मामले में ज्यादा वृद्घि होती है तो सरकार द्वारा उसे नियंत्रित करने के लिए वहां माइक्रो कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया जाता है। वहां के एरिया में वैरिकेट लगा दिया जाता है और वहां अनाधिकृत आना जाना प्रतिबंधित कर दिया जाता है, अगर कोई व्यक्ति वहां आता जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाती है।

एसीसी दिखा रही है प्रशासनिक अधिकारी को अपने कंपनी होने का रौब है 

शासन द्वारा यह स्पष्ट आदेश है कि कंपनी को अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कंपनी के अंदर रखकर ही काम करवाना है लेकिन एसीसी कहीं ना कहीं प्रशासनिक अधिकारी को अपने कंपनी होने का रौब दिखा रही है क्योंकि एसीसी कंपनी यह मान चुकी है कि वह कटनी जिले की नंबर वन कंपनी है और यहां का प्रशासन हमारे खिलाफ निर्णय लेने में सक्षम नहीं रह गया। एक जमाना हुआ करता था कि यही एसीसी कंपनी को, नाम था इकबाल सिद्दीकी , नाम तो सुना ही होगा कोई नया नाम नहीं है, इकबाल सिद्दीकी नगर पंचायत कैमोर के अध्यक्ष थे। उनके कार्यकाल में एसीसी कंपनी की नाप करवाई गई थी। आप समझ सकते हैं कि किसी भी कंपनी की नाप करवाना कितनी बड़ी बात होती है लेकिन अधिकारी अपने अधिकारों का सही उपयोग करें तो क्या नही हो सकता है। इकबाल सिद्दिकी ने बताया था कि क्या होती है प्रशासनिक अधिकारी एवं जन प्रतिनिधियों की पावर लेकिन उस मामले को नया अध्यक्ष आने के बाद कहां से कहां पहुंचा दिया गया।

क्षेत्रीय विधायक संजय सत्येंद्र पाठक करते है समस्यों का समाधान 

अभी भी कटनी जिले मे ऐसे लोकप्रिय विधायक मौजूद है उनके रहते एसीसी कंपनी को पूरी तरह आजादी नहीं मिली है। कहीं ना कहीं विधायक के संज्ञान में यह बात नहीं आ पाती कि एसीसी कंपनी कई वर्षों से नगर वासियों का शोषण कैसे कर रही है। उनके संज्ञान में यदि यह बात आती है वह निश्चित तौर पर ऐसे गंभीरता से लेते हुए समाधान निकालेगे क्योंकि वह क्षेत्र वासियों को अपना परिवार मानकर उनके सुख दुख में साथ निभाते हैं।

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को भी यह वीडियो देखना चाहिए और उन्हें यह समझना चाहिए कि अधिकारी और कर्मचारियों में कोई अंतर नहीं होता। उनकीं इस मानसिकता के अनुसार अधिकारियों कर्मचारियों पर कैसे भेदभाव कर सकते हैं।

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