मध्यप्रदेश का राजनैनिक चुनावी संग्राम, 7,8,9 बार चुने गए ये विधायक, फिर भी नहीं बनाए गए मंत्री

लोकसभा चुनाव से पहले दिग्गजों को क्या कैबिनेट में मिलेगा गिफ्ट ?

(छतरपुर) लोकसभा चुनाव से पहले कैबिनेट से बाहर हुए दिग्गजों को मौका मिल सकता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल की टीम बन गई है । तीनों राज्यों में कुछ ऐसे वरिष्ठों विधायक हैं, जिन्हें कैबिनेट में जगह नहीं मिली है। पूर्व की सरकार में ये लोग मंत्री रह चुके हैं। नई सरकार में ये सभी लोग मंत्री नहीं बनाए गए हैं। हालांकि इनकी उम्मीदें खत्म नहीं हुई है। मंत्री नहीं बनाए गए, सीनियर विधायकों को उम्मीद है कि नए साल में रिक्त पदों पर उन्हें मौका मिल सकता है। मध्य प्रदेश में ऐसे वरिष्ठ विधायकों की फेहरिस्त लंबी है।

दरअसल, मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री सहित सभी 31 मंत्रियों को विभागों का बंटवारा भी हो चुका है। ऐसे में अब 10 नेता ऐसे हैं जो पूर्ववर्ती शिवराज सरकार में मंत्री थे, लेकिन डॉक्टर मोहन यादव की कैबिनेट में जगह नहीं मिली। इनमें तो कई वरिष्ठतम विधायक हैं। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि सरकार उन्हें न्यू ईयर गिफ्ट दे सकती है। दिलचस्प बात तो है कि जिन्हें मंत्री पद के लिए मौका नहीं मिला है, उनमें से ऐसे कई विधायक हैं जो 9 बार तक चुनाव जीते हैं।

नौ बार के विधायक हैं गोपाल भार्गव
मध्य प्रदेश में गोपाल भार्गव एक ऐसे ही नेता हैं जो लगातार 9 बार से विधायक हैं। विधानसभा में सबसे वरिष्ठ हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ में पुन्नू लाल मोहले सात बार के विधायक हैं और सबसे वरिष्ठ नेता हैं। राजस्थान में कालीचरण सराफ भी ऐसे ही हैं। इन सभी को इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है।

लोकसभा चुनाव से पहले मिल सकता है गिफ्ट
ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि अब खाली पड़े मंडल और निगम में नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। क्योंकि 2 महीने बाद लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लग सकती है। ऐसे में निगम-मंडल के सभी पद भी भरे जा सकते हैं। इनमें सबसे ऊपर मध्य प्रदेश से गोपाल भार्गव और छत्तीसगढ़ से पुन्नू लाल मोहले का नाम है, जिन्हें बड़ा पद दिया जा सकता है।

शिवराज सरकार में थे 33 मंत्री
मध्य प्रदेश में पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान सरकार में 33 मंत्री थे। इनमें से 10 पूर्व मंत्री ऐसे हैं जो चुनाव जीतकर तो आए लेकिन इस बार मंत्री नहीं बनाए गए। इन नेताओं में 9 बार के विधायक गोपाल भार्गव, प्रभु राम चौधरी, बृजेंद्र सिंह यादव, भूपेंद्र सिंह, बृजेंद्र प्रताप सिंह, बिसाहू लाल सिंह, बृजेंद्र सिंह यादव, उषा ठाकुर, हरदीप सिंह डंग, ओम प्रकाश सकलेचा और मीना सिंह शामिल हैं।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के दूसरे ही दिन सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का अध्यक्ष पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसुमरिया को नियुक्त कर दिया था। उसके बाद अभी तक कोई भी नियुक्ति नहीं की गई हैं। अब जल्द ही नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने का आसार हैं।

✍️ (पंकज पाराशर)
    RPKP INDIA NEWS
           छतरपुर

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