पितरों को नमन ….. रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम से
(मैहर) वो कल थे तो आज हम हैं उनके ही तो अंश हम हैं। जीवन मिला उन्हीं से उनके कृतज्ञ हम हैं, सदियों से चलती आयी श्रंखला की कड़ी हम हैं। गुण धर्म उनके ही दिये उनके प्रतीक हम हैं, रीत रिवाज़ उनके हैं दिये संस्कारों में उनके हम हैं। देखा नहीं सब पुरखों को पर उनके ऋणी तो हम हैं, पाया बहुत उन्हीं से पर न जान पाते हम हैं। दिखते नहीं वो हमको पर उनकी नज़र में हम हैं, देते सदा आशीष हमको धन्य उनसे हम हैं। खुश होते उन्नति से दुखी होते अवनति से, देते हमें सहारा उनकी संतान जो हम हैं।
इतने जो दिवस मनाते मित्रता प्रेम आदि के, पितरों को भी याद कर अपने कर्तव्य का निर्वाहन करते हुए जो नियम से पितरों के लिए तर्पण करते है वह वास्तव में सनातन धर्म में वर्णित हमारे संस्कार को प्रकट करते हुए भावी पीढ़ी को यह शिक्षा रूपी पेरना देने वाला कार्य होता है। पितरों को नमन। हम सभी के पूर्वज सम्पूर्ण परिवार पर अपना आशीर्वाद सदा बनाए रखे।
