सिकल सेल एनिमिया से पीड़ित बच्चो से करे प्रेमपूर्वक व्यवहार- डॉ हितेश मुजाल्दे

(खरगोन)  प्रधान मंत्री कालेज ऑफ एक्सीलेंस मे एनसीसी इकाई एवं रेडक्रॉस सोसाईटी द्वारा प्राचार्य डॉ. शैल जोशी के मार्गदर्शन में सिकल सेल एनिमिय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान के मुख्य वक्ता रक्षा हॉस्पिटल खरगोन के डॉ. हितेश मुजाल्दे ने इस अनुवंशिक बिमारी के बारे में बताया कि सिकल सेल से पीडित विद्यार्थी दर्द में रहते है, जिससे वे अपनी पढाई पर फोकस नहीं कर पाते है। इसलिये या तो वे जल्दी अपनी पढाई छोड देते है या बहुत ज्यादा दिनांे तक अपनी पढाई जारी नहीं रख पाते है।ऐसे विद्याथियों से शिक्षकों को प्यार से पेश आना चाहिये। उन्होंने बताया कि सिकल सेल एनिमिया असामान्य हिमेग्लोबिन के कारण होने वाली रक्त की एक अनुवांशिक बिमारी है। जिसमंे लाल रक्त कोशिकायें सिकल के आकार की हो जाती है। यह उनके ऑक्सिजन ले जाने की क्षमता और रक्त प्रवाह की मात्रा को कम करती है। जिससे खून की कमी हो जाती है। उन्होने आगे बताया कि अनुवांशिक रोग को जड से खत्म करने का कोई उपाय नहीं है, लेकिन सही समय पर उपचार द्वारा इसे बढने से रोका जा सकता है।

इस रोग से पीड़ित व्यक्ति और ऐसे बच्चो का जीवन अधिकतम 20 वर्ष का होता है। हालांकि दवाईयों के माध्यम से जीवन 35 से 45 वर्ष तक बढाया जा सकता है। हाथ पैरों मंे सूजन, कमर दर्द, सीने में दर्द, थकान, चक्कर आना, घबराहट होना, खून की कमी, पीलिया होना, पेट दर्द होना, पेशाब में खून आना, बार-बार गर्भपात होना, बार-बार बुखार आना व बीमार होना और कुपोषण की वजह से वजन एवं लम्बाई बढने मे देरी होना आदि इसके लक्षण है। ऐसे मरीजों को ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिये। हरी पत्तेदार सब्जियां खानी चाहिये एवं बाहर का खाना नहीं खाना चाहिये। इस कार्यक्रम में एनसीसी के केडेट्स, महाविद्यालय के छात्र-छात्राओ सहित महाविद्यालय स्टाफ उपस्थित था। कार्यक्रम का संचालन एनसीसी महिला अधिकारी डॉ. रंजीता पटीदार नेएवं आभार संतोष कुमार राठौड ने माना।

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