समाज में जन जाग्रति लायें तभी देश व प्रदेश विकास की मुख्यधारा में जुड़ सकेगा – चंबल कमिश्नर श्री मिश्रा

* मुरैना *

बिरसा मुण्डा मरकर भी आज अमर है, इनके गीतों की आवाज नागपुर के जंगलों में अमर है – कलेक्टर श्री वर्मा

चंबल संभाग के कमिश्नर श्री आरके मिश्रा ने कहा कि जननायक बिरसा मुण्डा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को रांची झारखंड़ में हुआ था। उन्होंने 25 वर्ष की उम्र में ही ब्रिटिश सरकार से लोहा लेकर भारत को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 3 मार्च 1900 को अंग्रेजों ने बिरसा को गिरफ्तार कर रांची जेल में बंद कर दिया था। जेल में शारीरिक प्रताड़ना झेलते हुये 9 जून 1900 को बिरसा वीरगति को प्राप्त हो गये। उन्होंने 25 वर्ष की उम्र में ही समाज के लिये वो कर दिखाया, जो आज हमारे देश व प्रदेश में जननायक के रूप में पहचाने जाते है। यह बात उन्होंने नगर निगम के सभाकक्ष में जननायक बिरसा मुण्डा के जन्मदिवस पर संबोधित करते हुये कही। इस अवसर पर कलेक्टर श्री अनुराग वर्मा, जिला पंचायत के सीईओ श्री तरूण भटनागर सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित थे।
चंबल कमिश्नर श्री आरके मिश्रा ने कहा कि जननायक बिरसा मुण्डा ने कम उम्र में ही समाज के लिये वो कर दिखाया। उसकी बजह से आज आदिवासी समुदाय में उनका जन्म धूमधाम से मनाया जाता है। अपने यहां भले ही उनका जन्म नहीं हुआ है, किन्तु उन्होंने प्रदेश व देश को जो दिया, उसी का यह फल है। उन्होंने कहा कि आदिवासी जननायक बिरसा मुंडा द्वारा अपने आदिवासियों द्वारा जल, जमीन और जंगल के लिए किए गए संघर्षों को याद करते है। सभी से शिक्षित बनने, संगठित रहकर संघर्ष करने, साथ ही अपने हक व अधिकारों के लिए आगे आकर एकजुट होकर संघर्ष करने का आव्हान भी किया।
उन्होंने कहा कि हम सभी को यह संकल्प लेना है कि किसी न किसी रूप में हमारे समाज में जो लोग समाज की मुख्यधारा से छूट गये है, उन्हें समाज की मुख्यधारा में जुड़ना है, तभी हम विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकते है। श्री मिश्रा ने कहा कि भारत देश विश्व की श्रेणी में जाने के लिये तैयार है, हमारे पास सभी संसाधन है, किन्तु समाज के जनजागरूक न होने के कारण हम उस श्रेणी में नहीं जुड़ पा रहे है। इसके लिये हम सभी को जनजागरूकता लानी होगी। तभी हम मुख्यधारा में जुड़ सकते है।
कलेक्टर श्री अनुराग वर्मा ने कहा कि बिरसा मुंडा ने सन् 1900 में अंग्रेजो के विरुद्ध विद्रोह करने की घोषणा करते हुए कहा “हम ब्रिटिश शाशन तन्त्र के विरुद्ध विद्रोह की घोषणा करते है और कभी अंग्रेज नियमो का पालन नही करेंगे, ओ गोरी चमड़ी वाले अंग्रेजो, तुम्हारा हमारे देश में क्या काम ? छोटा नागपुर सदियों से हमारा है और तुम इसे हमसे छीन नही सकते है। इसलिए बेहतर है कि वापस अपने देश लौट जाओ वरना लाशो के ढेर लगा दिए जायेंगे ”। इस घोषणा को एक घोषणा पत्र में अंग्रेजो के पास भेजा गया तो अंग्रेजो ने अपनी सेना बिरसा को पकड़ने के लिए रवाना कर दी। अंग्रेज सरकार ने विद्रोह का दमन करने के लिए 3 फरवरी 1900 को मुंडा को गिरफ्तार कर लिया जब वो अपनी आदिवासी गुरिल्ला सेना के साथ जंगल में सो रहे थे। उस समय 460 आदिवासियों को भी उनके साथ गिरफ्तार किया गया। 9 जून 1900 को रांची जेल में उनकी रहस्यमयी तरीके से मौत हो गयी और अंग्रेज सरकार ने मौत का कारण हैजा बताया था। उन्होंने कहा कि जननायक बिरसा मुण्डा मरकर भी अमर है, छोटा नागपुर के जंगलों में आज भी बिरसा लोकगीतों में जीवित है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुये मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री तरूण भटनागर ने कहा कि जननायक बिरसा मुण्डा के पदचिन्हों पर हम सभी को चलकर देश व प्रदेश को उच्च शिखर पर पहुंचाना है। आज का दिन हम सभी के लिये सौभाग्य का दिन है कि ऐसे जननायक के जन्म को आज हम सब मिलकर मना रहे। कार्यक्रम का संचालन श्री श्याम सिकरवार ने किया।

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