कहानी सच्ची है सेडमेप से मिला प्रशिक्षण अब आत्मनिर्भराता की राह मिली
(दमोह) महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने कई योजनाएं संचालित की जा रही है। उन्हें विभिन्न रोजगार मूलक और स्वरोजगार मूलक योजनाओं से जोड़कर प्रशिक्षण भी दिये जा रहे है। ऐसे प्रशिक्षण महिलाओं-युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने लाभदायी हो रहे है। दमोह जिले में स्थित उद्यमिता विकास केन्द्र सेडमैप में महिलाओं और युवतियों को कई प्रकार के प्रशिक्षण दिये जा रहे है। प्रशिक्षण प्राप्त कर वे आत्मनिर्भता की राह रह चल पड़ी है और स्वयं का स्वरोजगार स्थापित कर अच्छी आमदनी प्राप्त कर रही है। ऐसे ही हम यहा सेडमेप से प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं-युवतियों से चर्चा की है। आइए सुनते है उनकी कहानी उनकी जुबानी। दमोह निवासी गुड़िया ठाकुर कहती हैं मैंने सेडमैप से 3 महीने की सिलाई की ट्रेनिंग ली है, जिसमें ब्लाउज, सलवार सूट, और भी अन्य चीजें सिलना सीखा हैं। उन्होंने अपने घर में ही सिलाई सेंटर खोल लिया है। वे कहती है मैं सिलाई भी करती हूं और ट्रेनिंग भी देता हूं जिससे महीने का 4 से 5 हजार रूपये कमा लेती हूं। ट्रेनिंग के लिये गुड़िया सेडमैप दमोह को धन्यवाद दे रही हैं। दमोह निवासी गुरदीप कौर कहती हैं मैंने सेडमैप दमोह से सिलाई सीखी है, वहां पर बैग बनाना, सूट बनाना, ब्लाउज बनाना और भी अन्य काम सिखाए जाते हैं जो सिलाई से संबंधित है। वहां पर मैंने 3 महीने की ट्रेनिंग की है, वहां पर बहुत अच्छे से ट्रेनिंग दी जाती हैं। ट्रेनिंग लेकर आज मैं सिलाई का काम कर रही हूं, सिलाई से 5 से 6 हजार रूपये महीने कमा रही हूं। वे कहती है कि और भी लोग सिलाई सीखकर अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। तीन गुल्ली दमोह निवासी आभा जैन कहती है मैंने सेडमैप दमोह से 3 महीने सिलाई सीखी है, सिलाई सीख कर ब्लाउज, सूट, सलवार सूट, गाउन एवं फ्रॉक सिल लेती हूं। वे कहती है मैं इस व्यवसाय से 3 से 5 हजार रूपये महीने में कमा लेती हूं। वे सेडमैप को धन्यवाद दे रही हैं, कहती हैं आगे भी ऐसे ही सीखाते रहें और मैं ऐसे ही आगे बढ़ती रहूं। मारूताल दमोह निवासी आरती राजपूत कहती हैं मैंने सेडमैप से 3 महीने सिलाई की ट्रेनिंग ली है जिससे मैं महीने का 3 से 4 हजार रूपये कमा लेती हूं। वे कहती हैं सेडमैप में और भी ट्रेनिंग चलती रहे जिससे हमें नया-नया सीखने को मिले। इसके लिए वे सेडमैप को धन्यवाद दे रही हैं।
