मैहर वाली शारदे माता के धाम से एक अनमोल चिंतन…

     शब्द की महिमा

(मैहर)  शब्द का प्रयोग स्वतंत्र है लेकिन इनका दुरुपयोग बहुत महंगा सिद्ध हो सकता है। कोई भी शब्दों को छू नहीं सकता है लेकिन शब्दों का प्रभाव किसी के भी दिल को बहुत गहराई तक छू सकता है इसीलिए कहते भी हैं कि शस्त्रों से लगी चोट ठीक हो सकती है किन्तु शब्दों की चोट शीघ्र ठीक नहीं होती।

शब्दों का प्रयोग सोचकर समझकर करना चाहिए। आपके द्वारा गलत अभद्र गाली रूपी शब्द व्यक्ति की आत्मा को झकझोर देते है अर्थात तलवार से लगे घाव तो धीरे धीरे भर जायेंगे। किंतु शब्द के द्वारा लगे घाव कदापि नही भरे जा सकते है वह सदा गुंजायमान रहते है। इसलिए तो कहा गया है की
‼️शब्द सहारे बोलिये, शब्द के हाथ न पाँव।
एक शब्द औषधि करे, एक शब्द करे घाव।।‼️

यह थी शब्द की महिमा। आपको सोचना है की हम किस प्रकार के शब्द का प्रयोग करे।

✍️ रवींद्र सिंह (मंजू सर)

          मैहर

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