“श्री राम और अयोध्या” : रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम से
(मैहर) भारतीय परंपरा के अनुसार श्री राम का समय त्रेता युग का है। भारतीय गणनाओं के अनुसार लगभग 869,125 वर्ष हो चुके हैं। इन करीब 8 लाख वर्षों में भारत भूमि ने बड़े धैर्य के साथ अनगिनत उतार चढ़ाव झेले हैं। राम भारत की जनता के दिलों की धड़कन है, इसलिए राम हर चीज में लीन है, इसलिए किसी के सम्मान में नमस्ते की जगह “राम-राम” का प्रयोग किया जाता है। भगवान महावीर का जन्म लगभग 600 ईसा पूर्व हुआ था, जिनका परिवार इक्ष्वाकु वंश से था। ये वही वंश है जिसमें श्री राम का जन्म हुआ था। ऐसा लगता है कि श्री महावीर तक इक्ष्वाकु वंश और अयोध्या/साकेत सदियों तक सुरक्षित रहे।
रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम कहती है कि फिर शुरू होता है भारत की दौलत लूटने और चोरी का इतिहास। 475 ईसा पूर्व के आसपास हुन्स/ हूण ने भारत को लूटने शुरू किया। लगभग 200 ईसा पूर्व शाकास/फेक ने लूटपाट शुरू कर दी।इतिहास कारों ने लिखा है कि अयोध्या को पहली बार शाकों ने ही ध्वस्त किया था, क्योंकि वे समझते थे कि जब तक अयोध्या खड़ी है, भारत का हर नागरिक अपनी जान देकर भी भारत की रक्षा करेगा। अयोध्या का अस्तित्व ही खत्म हो गया। भारत कई वर्षों तक अंधेरे में डूबा रहा। लेकिन भारतीय लोगों ने कभी आत्मविश्वास नहीं खोया और इस प्रकार उज्जैन में महाराजा विक्रमादित्य का उदय हुआ।
रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम कहती है कि राजा विक्रमादित्य ही थे जिन्होंने शाकों को भारत भूमि से हमेशा के लिए बाहर निकाल दिया, और विजय के साथ ही विक्रम युग/विक्रम-संवत की शुरुआत हुई। विक्रम सम्वत् ई.सी. से 57 वर्ष का है। इसी विक्रमादित्य ने ही बर्बाद हुई अयोध्या का पुनर्निर्माण किया था, इसीलिए भारतीय इतिहास में राजा विक्रमादित्य का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है।भारत की धरती से शंकाओं को भगाकर, भारतीय पहचान और आत्मविश्वास को पुनः जगाकर अयोध्या में राम मंदिर एवं लोक मूर्ति श्री राम की जन्मस्थली का निर्माण करने वाले उस महान राजा को बारम्बार नमन। अयोध्या और राम मंदिर के पुनरुद्धार ने भारतीय जनता का विश्वास सदियों तक जिन्दा रखा और किसी की नजर कभी भी भारत की ओर नहीं पड़ी।
मेरी कलम कहती है कि जब दुनिया की नज़र चोरी करने पर हो तो एक छोटी सी झपकी भी महंगी पड़ती है। छठी शताब्दी से ही भारत को लूटने के लिए मुगल लुटेरों के हमले बार-बार होने लगे। इस लूटपाट और हत्या के दौर में भारत का समय तेजी से चल रहा था। बार-बार हुए हमलों ने भारतीय एकता और साम्राज्यों की कमर लगभग तोड़ दी। 1526 में वो समय आया जब बाबर दिल्ली पर कब्जा करने में सफल हुआ और भारत के काले दिन शुरू हुए।बाबर के ही परिवार में पैदा हुए औरंगजेब (1658-1707 ईस्वी) ने फिर अयोध्या और राम मंदिर को ध्वस्त कर दिया और उसकी नींव और खंभों पर मस्जिद की संरचना बनाई। कहा जाता है कि पहले (1940 से पहले) इसका नाम “मस्जिद-ए-जनस्थान” था और शायद बाद में इसका नाम बाबरी – मस्जिद रखा गया था।औरंगजेब का ये कृत्य ऐसा था जैसे किसी को आधा मर कर उसके सामने बलात्कार, अत्याचार, दुष्कर्म, लूटपाट और उसके घर वालों के साथ सब कुछ करो और उसे नपुंसक साबित करते रहो। भारत की जनता कई सदियों से इस कटाक्ष और कई मानसिक यातनाओं का बोझ झेल रही है। ना जाने कितने युद्ध हुए और अनगिनत वीरों ने बलिदान दिया। गुरु गोबिंद सिंह जी ने भी औरंगजेब की सेना से अयोध्या की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी थी, लेकिन यह लड़ाई एक के बाद एक जब तक औरंगजेब अयोध्या पर कब्ज़ा नहीं कर सका तब तक जारी रही।
रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम कहती है कि राम मंदिर ईंटों और चट्टानों का संग्रह नहीं है। यह भारतीय इतिहास, सभ्यता, संस्कृति और पहचान का स्मारक है। यह भारत की महानता का एक स्तंभ है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जन्म भूमि की पहचान है। 8 लाख वर्ष बीत जाने के बाद भी जो कथा कल सी लगती है वो श्री राम की अमर कथा है। हर व्यक्ति के हृदय में बसे श्री राम की आराधना है। यह जनता के मन का श्रेय है। यही कारण है कि 1992 में हजारों राम भक्तों ने मौत की परवाह न करते हुए भी राम मंदिर को पुनर्जीवित करने की जिम्मेदारी उठाई और हजारों लोगों ने अपने ही देश में, अपने ही शासन में फिर से जान दे दी, लेकिन उन्हें कोई रोक नहीं पाया। ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर भी भारत के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह साबित होता है कि इतिहास को विकृत नहीं किया जा सकता।आज फिर सदियों बाद कई युद्ध, रक्तपात, अदालत और वाद-विवाद के बाद श्री राम मंदिर का निर्माण हुआ है। ये राम भक्तों, भारतीयों और हिन्दुओं के लिए गर्व की बात है।पहली बार राम मंदिर निर्माण करने वाले राजा विक्रमादित्य का भारत की जनता उसी श्रद्धा और सम्मान के साथ सम्मान करती है जैसे इस कार्य को करने में सहयोग करने वाले वर्तमान बलिदानियों, भक्त, रामभक्त और कार-सेवकों को अर्थात ये सभी श्रद्धा और सम्मान के हकदार हैं।
रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम कहती है कि यह कहने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए कि योगी, मोदी जी और उनकी सरकार ने पूरा सहयोग किया और इसे करवाने में अहम भूमिका निभाई।राम मंदिर सदियों तक सभी को प्रेरणा देता रहे और प्रभु श्रीरामजी की तरह सभी को कड़ी मेहनत का संदेश देता रहे।
✍️ रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर
