लड़कियों एवम लड़को का तुलनात्मक चिंतन क्या यह उचित है?….. रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम से

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(मैहर) कुछ लड़कियां सिगरेट पीते हुए या शराब पीकर ये कहती है कि जब लड़के पी सकते है तो हम क्यों नहीं…? उन्ही लड़कियों से मेरी कलम कहना चाहती हैं…. कि लड़कों की बुरी आदते आप अपना रही हो अच्छी बात है, लेकिन कभी अच्छी आदते भी अपना लिया करो जो कि बिंदु वार रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम के अनुसार इस प्रकार है…
(1)रास्ते में कोई लड़की अगर गाड़ी से गिर जाये तो सबसे पहले लड़के ही उसकी मदद करते है, लेकिन अगर कोई लड़का गिर जाये तो कोई भी लड़की उसकी मदद नहीं करती आखिर क्यों…..?

(2) लड़कियों को लड़के रास्ते में लिफ्ट दे देते है मगर, लड़कियां लडको को कभी भी लिफ्ट नहीं देती हैं आखिर क्यों…..?

(3)पुरुष लड़कियों के लिए मोमबत्ती मार्च में बहुतायत में शामिल होते है लेकिन लड़किया पुरुषो के हक़ के लिए कभी शामिल नहीं होती आखिर क्यों…..? यदि कोई पुरुष किसी स्त्री द्वारा झूठे आरोपों से प्रताड़ित होता है तो महिलाएं उल्टा उपहास उड़ाती हैं आखिर क्यों…..?

(4)पति अपनी पत्नी को तलाक के बाद भरण पोषण देता है,क्यों न पत्नी भी दिया करे…..?

(5) भीड़ में जब कोई लड़की किसी लड़के को पीट देती है तो बाकी लोग भी लड़के को ही दोषी मानते है आखिर क्यों? उसी प्रकार जब कोई लड़का किसी लड़की को पीटे तो लड़कियों को चाहिए की वो भी लड़की को पीट दे….क्योंकि….ये सब काम जब लड़के कर सकते है तो लड़कियां क्यों…..?

✍️ रवीन्द्र सिंह (मंजू सर)
  RPKP INDIA NEWS
              मैहर

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