एक कहानी – विश्वास तोड़ने से मन का घाव नहीं भरता
(मैहर) गरीब किसान देवेंद्र बहुत ज्यादा मेहनत करता था, तब जाकर उसके परिवार का गुजारा चलता था। मेहनत करने में वह कोई प्रकार की कमी नहीं रखता था फिर भी उसका हाथ हमेशा ही तंग रहता था। उसके पास में केवल पांच बीघा खेती की जमीन थी इसके अलावा कुछ भी नहीं था। जब आषाढ़ का महीना आता अपने खेत को तैयार करता बीज बोता फसल काटता 12 महीने तक इस फसल से अपना घर का काम चलाता था।
रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम कहती है कि इतनी मेहनत करने के बाद में भी उसके पास में दो पैसों की बचत नहीं होती थी। मन में सोचता क्या मेरी तकदीर में यही लिखा हुआ है क्या या और भी कुछ लिखा हुआ है। खेत के किनारे बैठ बैठ वह अपने मन में यह चिंतन करना प्रारंभ कर देता है। इस समय उसका ध्यान सामने की तरफ जाता है उसने देखा सामने एक बिल से नागराज बाहर निकल रहा है। बहुत बड़े नागराज को देखकर एक बार तो उसके मन में डर पैदा हो जाता है कहीं मेरे को यह काट डस न ले । फिर उसके मन में विचार आता है मेरे को इसके साथ मैत्री का संबंध स्थापित करना चाहिए क्या पता यह मेरे खेत की रक्षा करने वाला ही हो। मेरे को इसके साथ में मित्रता का संबंध बना लेना चाहिए। वह तत्काल एक कटोरी में दूध लेकर आता है रोटी चूर कर नागराज के सामने रख देता है , नागराज के दिल दिमाग में भी बहुत ज्यादा परिवर्तन आ जाता है अच्छा यह मेरे साथ में इतना अच्छा व्यवहार कर रहा है मेरे को दूध रोटी खिला रहा है मेरे को भी बदले में कुछ करना चाहिए उसके मन में भी अच्छी भावना जागती है दूध पीने के बाद वह एक सोने की मोहर उस प्याले में रख देता है अपने बिल में चला जाता है , किसान देवेंद्र उठकर आता है देखता है प्याले में सोने की मोहर है वह बहुत ज्यादा खुश हो जाता है बाजार में जाता है स्वर्णकार को वह मोहर बेच देता है बदले में पैसा आता है उसके कपड़े मिठाई सब्जियां लेकर अपने घर पर पहुंचता है। आज अपने परिवार के साथ बैठकर उसने पहली बार भोजन का आनंद लिया था , देवेंद्र प्रतिदिन खेत जाते समय रोटियां दूध अपने साथ में ले जाता है नागराज को खिलाने के लिए नागराज भी हमेशा खाने के लिए आता है बदले में एक सोने की मोहर रख कर चला जाता है देखते देखते गरीब किसान देवेंद्र आज धनवान किसान के रूप में वह बन जाता है क्योंकि उसके पास सोने का भंडार भरना प्रारंभ हो गया था।
रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम कहती है कि आज उसके सामने समस्या आ जाती है उसको किसी विशेष काम के लिए बाहर जाना था खेत में अब रोटी दूध लेकर कौन जाएगा नागराज को रोटी दूध कौन खिलाएगा यह उसके मन में विचार आता है। उसने अपने बेटे सत्यकुमार को अपने पास में बुलाया और कहा बेटा यह दूध रोटी लेकर तेरे को खेत में जाना है खेत की रक्षा करना है देख इसको वहां पर रख देना नागराज आएगा वह आराम से दूध रोटी खाएगा एक सोने की मोहर रख कर जाएगा वह मोहर तुम घर पर लेकर आ जाना , सत्यकूमार अपने पिता की बात को मानते हुए प्रातः काल दूध रोटी लेकर खेत की तरफ रवाना हो जाता है नागराज के पास में दूध भरा कटोरा रोटी रख देता है नागराज आता है आराम से दूध रोटी खाना प्रारंभ कर देता है जाते समय सोने की मोहर रख कर चला जाता है। सत्यकुमार मन में विचार करना प्रारंभ कर देता है लगता है इस नागराज के पास में सोने का भंडार है यह रेत में छुपा कर रखता है क्यों न इस नागराज को मार कर सारा सोना है वह एक साथ में निकाल लिया जाए तो अच्छा रहेगा यह विचारधारा मन में आती है अगले दिन पिता के घर पर नहीं आने के कारण व स्वयं दूध का कटोरा लेकर पहुंच जाता है अपने खेत में , दूध कटोरा नीचे रख देता है। नागराज का आगमन होता है आज सत्यकुमार के मन में यह विचार आया था इसको मार कर काम तमाम करना है सारा धन सोना एक साथ में अपने घर पर ले जाना है , नागराज आराम से दूध रोटी सेवन करना प्रारंभ कर देता है इस समय सत्यकुमार एक लठ लेकर आता है नागराज पर जोर से लाठी मारता है प्रहार होते ही नागराज फनकार करना प्रारंभ कर देता है आवेश में आकर सत्यकुमार के डंक लगा देता है देखते-देखते उसका वहीं पर प्राणंत हो जाता है, देवेंद्र जब अपने घर पर आता है एक बार तो अपने बेटे की मृत्यु को देखकर मन में दुख आता है फिर आक्रोश भी आता है देखो मेरे बेटे ने कैसा अन्याय किया है बेटे का अंतिम क्रिया कर्म सारा संपन्न हो जाता है उसके पश्चात वह अपने खेत की तरफ अपने कदमों को आगे बढ़ाता है , नागराज के लिए दूध रोटी भी साथ में ले जाता है कटोरा भरकर नागराज के स्थान पर रख देता है, नागराज बाहर आता है क्रोध के साथ देवेंद्र …
✍️ रवीन्द्र सिंह (मंजू सर)
RPKP INDIA NEWS
मैहर
