मझगवां क्षेत्र में बच्चों के पोषण प्रबंधन के लिए माइक्रो प्लान बनाकर कार्य करें
लक्षित गांवों में आरबीएसके की टीम नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण करेगी कलेक्टर ने ली जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक
(सतना) कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस की अध्यक्षता में शुक्रवार को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में पूरे जिले विशेषकर मझगवां क्षेत्र में बच्चों के पोषण प्रबंधन के लिए माइक्रो प्लान और एसओपी बनाकर स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग के अमले को कार्य करने के निर्देश दिये गये है। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शुक्ला, डीआईओ डॉ. सुचित्रा अग्रवाल, सभी बीएमओ, बीपीएम, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला विकास राजीव सिंह सहित सभी महिला बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर ने कहा कि मझगवां और परसमनिया क्षेत्र में स्वास्थ्य और पोषण सुविधाओं का नेटवर्क मजबूत करें और आंगनवाडी केन्द्र तथा स्कूलों में दर्ज बच्चों का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण किया जाये।
उन्होंने कहा कि आरबीएसके की टीम प्रत्येक आंगनवाडी केन्द्र में जाकर माइक्रो प्लान के अनुसार स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाये। शिविर में उपस्थित बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार करें तथा जो बच्चे शिविर में नहीं पहुंच पा रहे उनके स्वास्थ्य के विषय में मैदानी अमले से जानकारी ली जाये। इसके लिए शिविर के दौरान उस क्षेत्र के सभी बच्चों के नाम का वाचन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली जाये। स्कूल में दर्ज बच्चों का परीक्षण जून माह में शैक्षणिक सत्र के दौरान किया जायेगा। कलेक्टर ने कहा कि पहाडी अंचल के क्षेत्र मझगवां और परसमनिया में गर्भवती और धात्री माताओं तथा 6 साल से कम उम्र तक के बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य परीक्षण पर फोकस करें।
चित्रकूट नगर पंचायत क्षेत्र में दूर-दूर के ग्रामीण एरिया शामिल है। नगर पंचायत के इन दूरस्थ गांव के वार्डो में आशा नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा जाये। जिन क्षेत्रों में एएनएम पदस्थ नहीं है, वहां टीकाकारण एवं अन्य स्वास्थ्य सेवाओं में सीएचओ की मदद ली जायेगी। टीकाकरण कार्य के लिए सीएचओ को इन्सेटिव भी दिये जाने का प्रावधान है। जिला स्वास्थ्य समिति के निर्णय अनुसार मझगवां क्षेत्र में कार्यरत आरबीएसके की एक टीम के अलावा एक टीम और संलग्न की जायेगी। कलेक्टर ने कहा कि रिमोट एरिया में अर्ली प्रेग्नेंसी रोकने और बर्थ कन्ट्रोल के लिए फैमिली प्लांनिग के विाषय में लोगों को जागरूक और प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है। पोषण पुनर्वास केन्द्र (एनआरसी) में सम्पूर्ण जिले की एनआरसी बेड की आक्युपेंसी 83 प्रतिशत पाये जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त की। मझगवां एनआरसी में 82 प्रतिशत और कोठी एनआरसी में 70 प्रतिशत बेड आक्युपेंसी पर कलेक्टर ने मझगवां (चित्रकूट) और कोठी के सीडीपीओ, बीसीएम, बीपीएम को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिये।
उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी को इन एनआरसी के लिए स्वास्थ्य विभाग की तर्ज पर महिला बाल विकास के अधिकारी को नोडल बनाने के निर्देश दिये। होम बेस्ड न्यू बार्न केयर में गत वर्ष 23396 जन्म पर 18506 एचबीएनसी बिजिट अर्थात 79 प्रतिशत होम केयर पाये जाने पर कलेक्टर ने अप्रसन्नता व्यक्त की। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि जिले के नगरीय क्षेत्रों के नगर परिषद के वार्डो में आशा नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा जाये। इसी प्रकार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी मझगवां में पोषण प्रबंधन के लिए संयुक्त कार्य योजना बनाये और चित्रकूट के जानकीकुण्ड और मझगवां में स्वास्थ्य और महिला बाल विकास के मैदान अमले को प्रशिक्षण दिलवाये। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में गांव-गांव में चिकित्सा उपचार और क्लीनिक चलाने वाले व्यक्तियों की वैधानिकता की जांच कराने और नियमित रूप से जांच कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये।
