100 दिन का रोजगार नहीं दे पाई भाजपा सरकार, अब 125 दिन की गारंटी सिर्फ नया नाम, नया छल और नया प्रचार : कुणाल चौधरी

(भोपाल) प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक श्री कुणाल चौधरी ने मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान पर मनरेगा, ग्रामीण रोजगार और किसानों के मुद्दे पर तीखा हमला बोला। इस अवसर पर पूर्व प्रदेश प्रवक्ता आनंद जाट, राहुल राज एवं मिथुन अहिरवार उपस्थित रहे।

कुणाल चौधरी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पहले भगवान श्रीराम के नाम पर राजनीति की, फिर प्रचार किया और अब भगवान श्रीराम के नाम पर गरीब मजदूरों को भ्रमित करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी विश्व की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना का नाम बदलकर “जी-राम (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन)” कर दिया गया है और 125 दिन रोजगार देने का दावा किया जा रहा है, जबकि सरकार पिछले दस वर्षों में मनरेगा के तहत गरीबों को 100 दिन का रोजगार भी उपलब्ध नहीं करा सकी।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार केवल योजनाओं के नाम बदलने में विश्वास करती है, लेकिन उसकी नीयत गरीबों को रोजगार देने की नहीं, बल्कि प्रचार करने की है। नाम बदलने से न तो रोजगार बढ़ेगा और न ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

श्री चौधरी ने बताया कि कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल एवं पंकज उपाध्याय द्वारा विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है कि पिछले दस वर्षों में प्रदेश के 52 जिलों में मनरेगा के तहत पंजीकृत मजदूरों में से एक प्रतिशत मजदूरों को भी पूरे 100 दिन का रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जा सका।

उन्होंने कहा कि जब भाजपा सरकार अपनी कानूनी जिम्मेदारी के तहत 100 दिन का रोजगार नहीं दे सकी, तब 125 दिन रोजगार देने की घोषणा केवल राजनीतिक प्रचार और जनता को गुमराह करने का प्रयास है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी की मांग को पूरा करने का लगातार प्रयास किया गया और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई थी, जबकि भाजपा सरकार ने इस योजना को लगातार कमजोर करने का काम किया।

कुणाल चौधरी ने कहा कि वर्ष 2021 से 2025 तक करोड़ों मजदूर मनरेगा में पंजीकृत रहे, लेकिन पूरे 100 दिन का रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या लगातार घटती गई। इससे स्पष्ट है कि भाजपा सरकार ने ग्रामीण रोजगार बढ़ाने के बजाय उसे कमजोर किया।

उन्होंने कहा कि वन अधिकार पट्टा धारकों को कानून के अनुसार 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 24 जिलों में एक भी पात्र श्रमिक को 150 दिन का रोजगार नहीं मिला। आदिवासी बहुल जिलों में भी स्थिति बेहद चिंताजनक रही। यह सरकार के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच का सबसे बड़ा अंतर है।

श्री चौधरी ने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में, जब गांवों में रोजगार की सबसे अधिक आवश्यकता थी, तब भाजपा सरकार ने लाखों गरीब मजदूरों के जॉब कार्ड ही काट दिए।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2020-21 में 1 करोड़ 34 लाख 94 हजार 974 श्रमिकों ने रोजगार की मांग की थी, जबकि 43 लाख 43 हजार 378 मजदूरों के नाम जॉब कार्ड से हटा दिए गए। इसी प्रकार वर्ष 2021-22 में 1 करोड़ 21 लाख 95 हजार 233 श्रमिकों ने काम मांगा, लेकिन 7 लाख 71 हजार 730 जॉब कार्ड समाप्त कर दिए गए।

उन्होंने कहा कि यह सरकार की गरीब और मजदूर विरोधी मानसिकता का सबसे बड़ा प्रमाण है। जिन लोगों को रोजगार देना चाहिए था, उन्हें ही व्यवस्था से बाहर कर दिया गया। इतना ही नहीं, सांसद आदर्श ग्रामों में भी रोजगार सृजन की स्थिति बेहद निराशाजनक रही।

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चार सीधे सवाल पूछे—
क्या मनरेगा का नाम बदल देने से रोजगार बढ़ जाएगा?
जब सरकार 100 दिन की कानूनी गारंटी पूरी नहीं कर सकी, तो 125 दिन रोजगार देने का दावा किस आधार पर किया जा रहा है?
करोड़ों पंजीकृत मजदूरों में से एक प्रतिशत से भी कम लोगों को 100 दिन का रोजगार क्यों मिला?
यदि सरकार वास्तव में ईमानदार है तो पिछले दस वर्षों का श्वेत पत्र जारी कर बताए कि कितने मजदूरों को पूरा रोजगार मिला?

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए लगातार नई घोषणाएं कर रही है। पहले मनरेगा को कमजोर किया गया, फिर उसका नाम बदल दिया गया और अब 125 दिन रोजगार का सपना दिखाया जा रहा है। जबकि गांवों में मजदूरी की मांग बढ़ रही है, रोजगार घट रहा है और लाखों मजदूर पलायन के लिए मजबूर हैं।

श्री चौधरी ने प्रदेश के किसानों के मुद्दे पर भी भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के साथ लगातार अन्याय कर रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 20 लाख मीट्रिक टन मूंग का उत्पादन हुआ है, लेकिन सरकार ने केवल 4.5 लाख मीट्रिक टन मूंग की खरीद की अनुमति दी है। अर्थात केवल लगभग 25 प्रतिशत उपज ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी जाएगी।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की जनता ने भाजपा को वर्षों तक सत्ता सौंपी, प्रदेश से 29 सांसद चुनकर संसद भेजे और श्री शिवराज सिंह चौहान को लंबे समय तक मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन इसके बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा। पहले गेहूं खरीदी में किसानों को नुकसान पहुंचाया गया और अब मूंग उत्पादकों के साथ भी अन्याय किया जा रहा है।

उन्होंने मांग की कि प्रदेश के प्रत्येक किसान की 100 प्रतिशत मूंग की खरीदी एमएसपी पर सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।

श्री कुणाल चौधरी ने कहा कि प्रदेश के मजदूरों और किसानों को झूठे वादे नहीं, बल्कि रोजगार और उनकी उपज का उचित मूल्य चाहिए। केवल योजनाओं का नाम बदलने से गांवों की तस्वीर नहीं बदलेगी। इसके लिए सरकार को अपनी नीयत और नीति दोनों बदलनी होंगी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार के झूठे प्रचार, अधूरे वादों और किसान-मजदूर विरोधी नीतियों को जनता के बीच लगातार उजागर करती रहेगी तथा किसानों और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से सदन तक पूरी मजबूती के साथ लड़ती रहेगी।

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