दतिया उपचुनाव से क्या खत्म होगा नरोत्तम मिश्रा का ढाई साल का वनवास ?

 “मैं हारा था, वो नहीं जीता था”… आखिर इस एक बयान के पीछे क्या है डॉ. नरोत्तम मिश्रा की पूरी चुनावी रणनीति

(छतरपुर) मध्य प्रदेश में दतिया विधानसभा उपचुनाव का बिगुल बजते ही सबसे अधिक चर्चा जिस चेहरे की हो रही है, वह हैं भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा। पार्टी ने अभी तक अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन दतिया में उनकी बढ़ी हुई राजनीतिक सक्रियता यह संकेत दे रही है कि वे इस चुनाव को केवल उपचुनाव नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक जीवन की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा मानकर मैदान में उतर चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस बार डॉ. नरोत्तम मिश्रा की राजनीति का केंद्र केवल चुनावी भाषण नहीं, बल्कि आत्ममंथन, आत्मस्वीकृति और संवाद है।
वर्ष 2023 की हार के बाद उन्होंने जिस तरह अपनी कार्यशैली, व्यवहार और जनसंपर्क में बदलाव किया है, उसे राजनीतिक जानकार उनकी वापसी की सुनियोजित रणनीति मान रहे हैं।

प्रचार अभियान और चुनाव 2023 की हार ने बदल दी पूरी राजनीतिक सोच
लगातार 2008, 2013 और 2018 में दतिया विधानसभा सीट जीतने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 2023 के चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने 7,742 वोटों से हराया था। लगभग 15 वर्षों तक दतिया की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेता रहे मिश्रा के लिए यह हार केवल चुनावी पराजय नहीं थी, बल्कि राजनीतिक आत्मविश्लेषण का अवसर भी बन गई। यही वजह है कि इस बार उनके चुनाव प्रचार का अंदाज पूरी तरह बदला हुआ दिखाई दे रहा है। पहले जहां उनकी पहचान एक आक्रामक नेता की रही, वहीं अब वे जनता के सामने अपनी कमियों को स्वीकार करते हुए बदलाव का भरोसा दिला रहे हैं।

‘मैं हारा था, वो नहीं जीता था’… एक बयान में छिपा पूरा संदेश
पिछले विधानसभा चुनाव को लेकर डॉ. नरोत्तम मिश्रा लगातार एक बात दोहराते रहे हैं—”वो नहीं जीता था, मैं हारा था।” राजनीतिक दृष्टि से यह केवल एक बयान नहीं है। इसका अर्थ यह माना जा रहा है कि वे हार की जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करते हैं और मानते हैं कि यदि जनता की अपेक्षाओं पर बेहतर ढंग से खरा उतरा जाए तो विश्वास दोबारा जीता जा सकता है। यही सोच इस बार उनकी पूरी चुनावी रणनीति की आधारशिला बनती दिखाई दे रही है।

‘हम सुधार करेंगे’… सिर्फ भाषण नहीं, पूरी चुनावी रणनीति प्रचार अभियान और चुनाव
डॉ. नरोत्तम मिश्रा लगातार अपनी सभाओं में कह रहे हैं कि यदि उनसे कोई गलती हुई है तो उसमें सुधार किया जाएगा। उनका कहना है कि कार्य, व्यवहार, विचार और आचरण हर स्तर पर परिवर्तन लाया जाएगा और वे पहले से अधिक विनम्र होकर जनता के बीच जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक भारतीय राजनीति में बहुत कम नेता सार्वजनिक मंच से अपनी कमियों में सुधार की बात करते हैं। इसलिए उनके इस संदेश को केवल चुनावी भाषण नहीं, बल्कि जनता और संगठन दोनों के प्रति विश्वास बहाली के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

बदलाव केवल भाषणों में नहीं, जमीनी रणनीति में भी दिख रहा
वर्ष 2023 की हार के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने अपनी राजनीतिक सक्रियता का पूरा स्वरूप बदल दिया। नाराज कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत मुलाकात, पुराने भाजपा नेताओं के घर पहुंचकर संवाद, घर घर संपर्क अभियान, सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी, राजनीतिक हलकों में इसे संगठन और जनता दोनों के साथ रिश्तों को फिर से मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है। जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की चुनौती भी है ।

राजनीतिक वापसी की सबसे बड़ी परीक्षा
भाजपा ने अभी तक दतिया उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। लेकिन राजनीतिक संकेत लगातार डॉ. नरोत्तम मिश्रा की ओर इशारा कर रहे हैं। यदि पार्टी उन्हें उम्मीदवार बनाती है तो यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट का मुकाबला नहीं रहेगा, बल्कि इसे उनकी राजनीतिक वापसी की सबसे बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जाएगा। वहीं यदि संगठन किसी दूसरे चेहरे पर भरोसा जताता है, तब भी दतिया के चुनावी समीकरणों में डॉ. मिश्रा की भूमिका बेहद प्रभावशाली रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक संदेश क्या है? राजनीति
दतिया उपचुनाव अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन एक बात साफ दिखाई दे रही है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने अपनी सक्रियता, बदले हुए व्यवहार और लगातार जनसंपर्क के जरिए यह संदेश दे दिया है कि उन्होंने वापसी की तैयारी पूरी कर ली है। उनके हालिया भाषणों में दिखाई दे रही विनम्रता, आत्मस्वीकृति और संवाद की राजनीति को केवल चुनावी बयान नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे 2023 की हार से निकले राजनीतिक निष्कर्षों पर आधारित नई रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

अब निगाहें भाजपा के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं। यदि पार्टी नेतृत्व उनकी दावेदारी पर मुहर लगाता है तो पिछले ढाई वर्षों के राजनीतिक आत्ममंथन, संगठनात्मक सक्रियता और बदली हुई कार्यशैली की असली परीक्षा इसी उपचुनाव में होगी।
✍️ पंकज पाराशर
RPKP INDIA NEWS
         छतरपुर

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